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Guwahati: श्रद्धालु, साधु और संन्यासी कामाख्या मंदिर के आसपास भी नहीं जा सकेंगे

By गुणातीत ओझा | Updated: June 18, 2020 11:45 IST

कोरोना महामारी को लेकर असम में कामाख्या मंदिर पर लगने वाला अंबूबाची मेला सादगी से मनाया जाएगा। मेले में श्रद्धालुओं, साधुओं और संन्यासियों को मंदिर परिसर के आसपास भी नहीं आने दिया जाएगा।

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ठळक मुद्देअसम के कामाख्या मंदिर में 22 जून से शुरू हो रह है अंबूबाची मेला।कोरोना के चलते मेले में श्रद्धालुओं, साधुओं और संन्यासियों के प्रवेश पर रहेगी रोक।

गुवाहाटी। असम में 22 जून से शुरू हो रहे अंबूबाची मेले के दौरान कोविड-19 महामारी के चलते श्रद्धालुओं और साधुओं को कामाख्या मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। मंदिर समिति ने बुधवार को यह जानकारी दी। इस मंदिर में 22 जून से चार दिनों तक अंबूबाची मेला लगेगा लेकिन बस पुरोहित ही विधि-विधान भर करेंगे।

मां कामाख्या देवालय के प्रवक्ता एम सी सरमा ने यहां बताया कि श्रद्धालुओं, साधुओं और संन्यासियों को मंदिर परिसर या आसपास के क्षेत्रों में आने की अनुमति नहीं होगी तथा यहां नीलाचल पहाड़ी के शिखर पर मंदिर के सभी प्रवेश द्वार बंद रहेंगे। उन्होंने कहा,‘‘ अंबूबामची मेला बड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक समागम है और इसका राज्य के पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़ा महत्व है लेकिन हमे वर्तमान स्थिति के चलते यह कष्टकारी और अतिवादी कदम उठाने के लिए बाध्य हैं।’’ उन्होंने असम सरकार, कामरूप (मेट्रो) जिला प्रशासन और लोगों से देवालय प्रबंधन समिति द्वारा व्यापक जनहित में लिये गये इस निर्णय के अनुपालन में पूर्ण सहयोग की अपील की।

हर वर्ष यह मंदिर इस धार्मिक विश्वास से चार दिनों के लिए बंद रहता है कि कि इस अवधि में देवी कामाख्या का वार्षिक ऋतुचक्र होता है। मंदिर पांचवें दिन खुलता है जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी का आशीर्वाद पाने के लिए पहुंचते हैं। इस मौके पर देश-विदेश से करीब 25 लाख लोग पहुंचते हैं। प्रवक्ता ने कहा कि मेला के दौरान सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों को कैंप, स्टॉल, बैनर लगाने की अनुमति नहीं होगी और वे भोजन भी नहीं वितरित कर पायेंगे।

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