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कब है चैत्र नवरात्रि 2019? जानिए घट स्थापना तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, अष्टमी, नवमी और नवरात्रि पारण तिथि

By गुलनीत कौर | Updated: March 25, 2019 09:44 IST

धर्म शास्त्रों के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व आता है, किन्तु इनमें से दो नवरात्रि - चैत्र और आषाढ़ ही लोगों के बीच लोकप्रिय है। पुराणों के अनुसार चैत्र नवरात्रों का समय बहुत ही भाग्यशाली बताया गया है। इसका एक कारण यह भी है कि प्रकृति में इस समय हर और नये जीवन का, एक नई उम्मीद का बीज अंकुरित होने लगता है। जनमानस में भी एक नई उर्जा का संचार हो रहा होता है।

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मां भगवती को समर्पित चैत्र नवरात्रि का पर्व समीप आ गया है। यूं तो वर्ष में चार बार नवरात्रि का शुभ पर्व आता है - चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीने में नवरात्री का पर्व मनाया जाता है। इनमें से दो नवरात्रि गुप्त होते हैं, जिन्हें तांत्रिक साधनाओं के लिए विशेष माना गया है। अन्य दो - चैत्र एवं आषाढ़ को सभी लोग मनाते हैं। उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के मुताबिक इस साल चैत्र नवरात्रि 6 अप्रैल 2019, दिन शनिवार को सूर्य उदय से प्रारम्भ होकर 14 अप्रैल 2019, दिन रविवार को प्रातः 6 बजे तक नवमी तत्पश्चात दशमी तिथि तक चलेंगे। 

चैत्र नवरात्रि 2019 कब है? (Chaitra Navratri 2019 start date, end date, puja shubh muhurat)

पंचांग के अनुसार 5 अप्रैल 2019, दिन शुक्रवार दोपहर 01:36 बजे से ही नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि लग जाएगी जो कि अगले दिन यानी 6 अप्रैल को दोपहर 02:58 बजे तक रहेगी। परंतु नवरात्रि का प्रारंभ 6 अप्रैल को सूर्य उदय होने के बाद से ही माना जाएगा। 6 अप्रैल की सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर सूर्य उदय होगा और धार्मिक रूप से तभी से नवरात्रि का शुभारंभ होगा। इसी दिन नवरात्रि का शुभ कलश भी स्थापित किया जाएगा। 6 अप्रैल की दोपहर बाद से प्रतिपदा तिथि समाप्त होगी और द्वितीया तिथि लग जाएगी।

चैत्र नवरात्रि महत्व (Chaitra Navratri 2019 importance, significance, why to celebrate)

धर्म शास्त्रों के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व आता है, किन्तु इनमें से दो नवरात्रि - चैत्र और आषाढ़ ही लोगों के बीच लोकप्रिय है। पुराणों के अनुसार चैत्र नवरात्रों का समय बहुत ही भाग्यशाली बताया गया है। इसका एक कारण यह भी है कि प्रकृति में इस समय हर और नये जीवन का, एक नई उम्मीद का बीज अंकुरित होने लगता है। जनमानस में भी एक नई उर्जा का संचार हो रहा होता है। लहलहाती फसलों से उम्मीदें जुड़ी होती हैं। सूर्य अपने उत्तरायण की गति में होते है ।ऐसे समय में मां भगवती की पूजा कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करना बहुत शुभ माना गया है। क्योंकि बसंत ऋतु अपने चरम पर होती है इसलिये इन्हें 'वासंती नवरात्रि' भी कहा जाता है। नवरात्रि के समय जहां मां के नौ रुपों की पूजा की जाती है वहीं चैत्र नवरात्र के दौरान मां की पूजा के साथ-साथ अपने-अपने कुल देवी-देवताओं की भी पूजा अर्चना की जाती है जिससे ये नवरात्र विशेष हो जाता है।

चैत्र नवरात्रि कलश स्थापन शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri 2019 Ghatasthapana date, shubh muhurat)

ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के अनुसार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त लाभ एवं अमृत चौघड़िया तथा शुभ अभिजीत मुहुर्त्त में किया जाना अति उत्तम होता है। इस वर्ष घट स्थापना प्रातःकाल 07:20 बजे से 08:53 बजे तक शुभ चौघड़िया में सर्वोत्तम है। यदि किसी कारण इस शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित नहीं कर पाए हैं तो अभिजीत मुहूर्त एवं मध्यान्ह 11:30 से 12:18 बजे तक का समय भी इस कार्य के लिए उत्तम होगा। वैसे इस वर्ष घटस्थापना सुबह सूर्योदय से दोपहर 02:58 से पूर्व प्रतिपदा तिथि में किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: 25-30 मार्च तक इन 6 राशियों पर होने वाली है धन वर्षा, भोलेनाथ की कृपा से हर काम में मिलेगी सफलता

कलश स्थापना की विधि (Ghatasthapana puja vidhi)

कलश स्थापना के लिये प्रतिपदा के दिन शुभ मुहूर्त से पहले उठाकर स्नान कर लें। एक रात पहले ही पूजा की सारी सामग्री एकत्रित करके सोएं ताकि सुबह समय से पूजा प्रारंभ की जा सके। स्नानादि करने के बाद लकड़ी के एक आसन पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। वस्त्र पर श्रीगणेश जी का स्मरण करते हुए थोड़े चावल रखें। अब मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर जौ बोएं, फिर इस पर जल से भरा मिट्टी, सोने या तांबे का कलश विधिवत स्थापित करें। कलश पर रोली से स्वास्तिक या ऊँ बनाएं। कलश के मुख पर रक्षा सूत्र भी बांधना चाहिये साथ ही कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखने चाहिये।

उपरोक्त सामग्री कलश में डालने के पश्चात कलश के मुख को ढक्कन से ढक कर इसे चावल से भर देना चाहिए। अब एक नारियल लेकर उस पर चुनरी लपेटें और फिर ऊपर से रक्षासूत्र बांध दें। इसे कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवी-देवताओं का आह्वान करें और अंत में दीप जलाकर कलश की पूजा करें व षोडशोपचार से पूजन के उपरान्त फूल व मिठाइयां चढ़ा कर माता का पूजन ध्यान पूर्वक करें। यदि संभव हो तो घट पर कुलदेवी की प्रतिमा भी स्थापित करें। कलश की पूजा के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

अष्टमी, नवमी 2019 (Ashtami, Navami 2019 date, time)

पंडित जी के अनुसार 6 अप्रैल 2019 को सूर्योदय 5 बजकर 47 मिनट से नवरात्रि का शुभ पर्व प्रारंभ हो जाएगा। 12 अप्रैल 2019, दिन शुक्रवार को सुबह 10:18 बजे से 13 अप्रैल दिन शनिवार को सुबह दिन में 08:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी। इसके बाद चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि लग जाएगी। 13 अप्रैल को महानवमी का व्रत होगा। 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक नवमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी। नवरात्रि का पारण 14 अप्रैल को प्रातः काल 6 बजे के बाद किया जाएगा। 

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