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बिहार में शराबबंदी की सफलता को लेकर अब गठबंधन दल उठाने लगे नीतीश सरकार पर सवाल, जीतन राम मांझी ने कही ये बात

By एस पी सिन्हा | Updated: February 21, 2021 14:55 IST

बिहार में शराबबंदी की कामयाबी को लेकर अब तक विपक्ष सवाल उठाता रहा है. गोपालगंज और मुजफ्फरपुर की घटना के बाद अब नीतीश कुमार की सरकार में सहयोगी जीतन राम मांझी और मुकेश साहनी ने भी शराबबंदी की सफलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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ठळक मुद्देगोपालगंज और मुजफ्फरपुर में जहरीली शराब से हुई मौत के बाद जीतन राम मांझी के सख्त तेवरयह सोचने वाली बात है कि जब राज्य में शराबबंदी कानून लागू है तो आखिर शराब बेची कैसे जा रही है: मांझीमुकेश सहनी ने कहा कि शराबबंदी एक अच्छा फैसला है, लेकिन पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया है

पटना:बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लगातार शराबबंदी को लेकर फजीहत हो रही है. शराबबंदी के बावजूद राज्य में जहरीली शराब से लोगों की मौत का मामला अब तूल पकड़ चुका है. विपक्षी पार्टियों के बाद अब सरकार में शामिल दलों ने भी शराबबंदी को लेकर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है.

गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में जहरीली शराब से हुई मौत को लेकर नीतीश सरकार में सहयोगी 'हम' प्रमुख जीतन राम मांझी ने गहरी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने इन मौतों के लिए उन जिलों के पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है. 

साथ ही मांझी ने राज्य सरकार से यह मांग की है कि जिन जिलों में मौत की यह घटना हुई है, वहां के एसपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए. 

मांझी ने नीतीश सरकार के शराबबंदी कानून पर सवाल खडा करते हुए कहा कि यह सोचने वाली बात है कि जब राज्य में शराबबंदी कानून लागू है तो आखिर शराब बेची कैसे जा रही है? जिन भी जिलों से जहरीली शराब मिलने का मामला सामने आया है, वहां नीतीश सरकार को ठोस कार्रवाई करते हुए वहां के एसपी और पुलिस अधिकारियों पर हत्या का केस दर्ज करना चाहिए ताकि अधिकारियों में भी खौफ बना रहे. 

उन्होंने कहा कि जिस तरह से मौत की यह घटना सामने आई है, वह साफ जाहिर करता है कि पुलिस किस तरह से काम कर रही है. इन मौतों के लिए पूरी तरह से पुलिस की लापरवाही सामने आ गई है. 

बता दें कि पूर्व मुख्‍यमंत्री जीतनराम मांझी के सुर भी शराबबंदी कानून को लेकर बदलते रहे हैं. महागठबंधन में जब वे शामिल थे तब इसमें संशोधन की मांग की थी. एनडीए में आए तो शराब मामले में जेलों में बंद लोगों के परिवार की भुखमरी की दुहाई दी. 

इधर उनके पुत्र व बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि शराबबंदी पूरी तरह सफल है. राज्‍य और समाज के हित में शराबबंदी बहुत जरूरी है. 

मुकेश साहनी ने भी शराबबंदी को बताया असफल

इस बीच राज्य के पशुपालन मंत्री मुकेश साहनी ने पहले बिहार में शराबबंदी को असफल बताया और बिहार सरकार को हर साल होने वाले 7 हजार करोड़ से ज्यादा के नुकसान की बात कही है.

उन्होंने कहा कि बिहार में 7 हजार करोड़ रुपए का सालाना नुकसान शराबबंदी कानून की वजह से है. उसके बावजूद सरकार ने अगर इसे लागू रखा है तो लोगों को भी यह बात समझनी चाहिए. 

लोगों के बीच जागरूकता की जरूरत बताते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि अगर शराब से जुड़ा कोई मामला सामने आता है तो उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दें. उसके बाद देखिए कैसे दोषियों पर कार्रवाई होती है. 

मुकेश सहनी ने कहा कि शराबबंदी एक अच्छा फैसला है, लेकिन यह पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया है, यह भी सच्चाई है. उन्‍होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रिम प्रोजेक्‍ट है. 

शराबबंदी पर कांग्रेस करती रही है आलोचना

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस शराब बंदी कानून की आलोचना करती रही है. कांग्रेस विधायक अजित शर्मा ने तो बकायदा इकसे लिए मुख्‍यमंत्री को पत्र भी लिखा था. उनका कहना था कि जिस समय शराबबंदी लागू हुई थी, उस समय कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया था. लेकिन अब लगता है कि यह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सका. 

अजित शर्मा ने कहा कि बिहार में शराब के धंधे की नई अर्थव्‍यवस्‍था बन रही है. हालांकि पार्टी में ही उनका विरोध भी हुआ था. यहां बता दें कि पिछले पांच दिनों में गोपालगंज और मुजफ्फरपुर जिले में जहरीली शराब के सेवन से 11 लोगों की मौत हो चुकी है. 

इनमें गोपालगंज जिले में छह लोगों की मौत के साथ दो लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है. वहीं मुजफ्फरपुर में भी दंपती सहित पांच लोगों की पिछले 48 घंटे में मौत हो चुकी है. 

टॅग्स :नीतीश कुमारजीतन राम मांझीबिहारमुकेश सहनी
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