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Income Tax रिफंड के लिए अब नहीं करना होगा लंबा इंतजार, एक दिन में पूरा होगा प्रोसेस

By भाषा | Updated: January 16, 2019 20:41 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आयकर विभाग की एकीकृत ई-फाइलिंग एंड सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) 2.0 परियोजना के लिए 4,24.97 करोड़ रुपये के व्यय को मंजूरी दी गई। 

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आयकर विवरण की ई-फालिंग, जांच-पड़ताल और कर रिफंड की पूरी प्रक्रिया को और त्वारित तथा सुगम बनाने के लिए अगली पीढ़ी की प्रणाली लागू करने की एक योजना को बुधवार (16 जनवरी) को मंजूरी दी है। इस 4,241.97 करोड़ रुपये की परियोजना का काम दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस को देने का निर्णय किया गया है। इससे रिटर्न की जांच पड़ताल का समय 63 दिन से घटकर एक दिन रह जाएगा और साथ ही रिफंड की प्रक्रिया को भी तेज किया जा सकेगा। 

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार (16 जनवरी) को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आयकर विभाग की एकीकृत ई-फाइलिंग एंड सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) 2.0 परियोजना के लिए 4,241.97 करोड़ रुपये के व्यय को मंजूरी दी गई। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए गोयल ने संवाददाताओं से कहा कि अभी आईटीआर की जांच पड़ताल में 63 दिन का समय लगता है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के बाद यह घटकर एक दिन रह जाएगा। गोयल ने बताया कि इस नयी प्रणाली को करीब डेढ़ साल में तैयार किया जाएगा। इसका तीन महीने तक परीक्षण किया जाएगा और उसके बाद इसे लागू किया जाएगा। 

उन्होंने बताया कि निविदा प्रक्रिया के बाद इन्फोसिस को इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए चुना गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रणाली सफल रही है और नई परियोजना अधिक कर अनुकूल होगी। सीपीसी परियोजनाओं के तहत आयकर विभाग में समस्त प्रक्रियाओं का एंड टु एंड आटोमेशन किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न नवोन्मेषी तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। 

मंत्रिमंडल ने मौजूदा सीपीसी-आईटीआर 1.0 परियोजना के लिए 2018-19 तक 1,482.44 करोड़ रुपये की एकीकृत लागत को भी मंजूरी दी है।  गोयल ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में अभी तक 1.83 लाख करोड़ रुपये के कर रिफंड जारी किए गए हैं। 

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस फैसले से जहां पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी वहीं रिटर्न की तेजी से जांच हो सकेगी और रिफंड प्रक्रिया भी तेज होगी। साथ ही इससे करदाताओं को जागरूक और शिक्षित करने में भी मदद मिलेगी। बयान में कहा गया है कि इससे जहां करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को तेज किया जा सकेगा वहीं स्वैच्छिक कर अनुपालन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। 

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