1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट में सबकी नजरें सरकार द्वारा खेलों के विकास के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर होंगी। सरकार ने 2019-20 के खेल बजट की राशि में 214 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की थी।
मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और खेलों के विकास के लिए 'खेलो इंडिया' नाम से राष्ट्रीय खेल कार्यक्रम चलाया है और इस कार्यक्रम के लिए बजट आवंटन की राशि में लगातार बढ़ोतरी भी की है।
2019-20 में खेलों को दिए गए थे 214 करोड़ रुपये ज्यादा
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के जुलाई 2019 में पेश पहले आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खेलों के लिए आंवटित राशि में फरवरी में तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश बजट में किए गए आवंटन में कोई बदलाव नहीं किया।
फरवरी 2019 में पेश अंतरिम बजट में खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय के लिये 214.2 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई थी। आवंटित राशि को पिछले साल के 2002.72 करोड़ रुपये की तुलना में 2216.92 करोड़ रुपये किया गया।
साई के बजट में की गई थी 55 करोड़ की बढ़ोतरी
वहीं भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) को पिछले साल संशोधित बजट में 395 करोड़ रुपये आवंटित किये गए थे जिसमें 55 करोड़ रूपये की बढ़ोतरी की गई। साइ को 2019-20 के बजट में 450 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे।
वहीं खेलो इंडिया कार्यक्रम के लिये बजट 550.69 करोड़ रुपये (संशोधित अनुमान) से बढ़ाकर 601.00 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
ओलंपिक 2020 को देखते हुए बढ़ाई गई थी पुरस्कार राशि
वहीं 2020 ओलंपिक खेलों को देखते हुए खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और पुरस्कार की राशि पिछले बजट के संशोधित अनुमान में 316.93 करोड़ और 2017.18 में 299.27 करोड़ रुपये थी जो बढ़ाकर 411 करोड़ रुपये कर दी गई है।
इसमें खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि 63 करोड़ रुपये से बढाकर 89 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय खेल विकास कोष को आवंटन दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर 68 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
राष्ट्रीय खेल महासंघों को दी जाने वाली सहायता राशि कमोबेश जस की तस है। पिछले बजट में एनएसएफ को 245.13 करोड़ रुपये दिये गए थे जिन्हें अब 245 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं।
साथ ही वित्त मंत्री ने बजट 2019 में खेलो इंडिया के तहत खिलाड़ियों के लिये राष्ट्रीय खेल शिक्षा बोर्ड के गठन की घोषणा करने का भी ऐलान किया था।
(PTI इनपुट्स के साथ)