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डब्ल्यूएफआई की बात मानते हुए जेएसडब्ल्यू पहलवानों के साथ त्रिपक्षीय अनुबंध पर सहमत

By भाषा | Updated: November 12, 2021 16:02 IST

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... अमनप्रीत सिंह ...

गोंडा, 12 नवंबर भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने निजी खेल गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) जेएसडब्ल्यू के साथ एक समझौता किया है जिसमें वह  पहलवानों के साथ त्रिपक्षीय अनुबंध कर सकता है और राष्ट्रीय खेल निकाय इसका हिस्सा होगा।

डब्ल्यूएफआई ने जेएसडब्ल्यू और ओजीक्यू (ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट) जैसे एनजीओ द्वारा उसे शामिल किये बिना पहलवानों के साथ अनुबंध की पेशकश करने पर आपत्ति जताई थी। डब्ल्यूएफआई यह भी आरोप लगाया था कि ऐसे एनजीओ की प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं थी क्योंकि इन संगठनों ने पहलवानों को दिए जा रहे समर्थन को लेकर उसे अंधेरे में रखा था।

तोक्यो ओलंपिक के बाद जब डब्ल्यूएफआई ने यह स्पष्ट किया कि वह भारतीय कुश्ती में किसी भी गैर सरकारी संगठन के ‘पिछले दरवाजे’ से किसी भी प्रवेश की अनुमति नहीं देगा, तब जेएसडब्ल्यू और ओजीक्यू ने राष्ट्रीय निकाय से संपर्क किया।

यह पता चला है कि ‘जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स’ के निदेशक पार्थ जिंदल ने डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के साथ तीन बैठकें की थीं और ओजीक्यू ने भी इसके समर्थन का प्रस्ताव पेश किया था।

नयी व्यवस्था के अनुसार, अगर जेएसडब्ल्यू किसी पहलवान का समर्थन करना चाहता है तो पहले उसे डब्ल्यूएफआई से सहमति लेनी होगी। अगर डब्ल्यूएफआई अनुमति देता है, तो जेएसडब्ल्यू एक समझौता मसौदा  तैयार कर डब्ल्यूएफआई को भेज सकता है। समझौते को मंजूरी मिलने पर चुने हुए पहलवान, जेएसडब्ल्यू और डब्ल्यूएफआई के बीच एक त्रिपक्षीय अनुबंध होगा।

डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष बृज भूषण ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘ हां, हम जेएसडब्ल्यू के साथ समझौता कर चुके हैं। वे अब हमारे साथ हैं। पार्थ जिंदल एक भद्र व्यक्ति के रूप में सामने आए, जो कुश्ती के समर्थक हैं।’’

चुने हुए पहलवानों के समर्थन के अलावा जेएसडब्ल्यू, डब्ल्यूएफआई के प्रायोजकों में से एक बन गया है। मुख्य राष्ट्रीय प्रायोजक टाटा मोटर्स के साथ अब से जेएसडब्ल्यू का लोगो (प्रतीक चिन्ह) पहलवानों और सभी कोच की जर्सी पर लगाया जाएगा।  

गोंडा में चल रही राष्ट्रीय चैंपियनशिप में जेएसडब्ल्यू को प्रमुख स्थान मिला जहां घरेलू आयोजन से संबंधित कई होर्डिंग और पोस्टर में कंपनी का नाम था। जेएसडब्ल्यू ने सौदे के अनुसार प्रति वर्ष तीन करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की है।

यह पता चला है कि डब्ल्यूएफआई को ओजीक्यू का प्रस्ताव सही नहीं लगा, जिसने प्रति वर्ष एक करोड़ रुपये की सहायता देने का वादा किया था।

डब्ल्यूएफआई के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘डब्ल्यूएफआई को ओजीक्यू की जरूरत नहीं है।’’

बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट जैसे स्टार पहलवानों को कोच और फिजियो जैसे समर्पित व्यक्तिगत सहायक स्टाफ के रूप में जेएसडब्ल्यू और ओजीक्यू से लगातार समर्थन मिला है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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