कोलकाताः पश्चिम बंगाल एक और महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले की ओर बढ़ रहा है और ऐसे में सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (तृकां) हाल के वर्षों की सबसे अहम संगठनात्मक कवायदों में से एक का सामना कर रही है। उसे ऐसी उम्मीदवार सूची तैयार करनी है जो सत्ता विरोधी रुझान को कम कर सके, स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को फिर से संतुलित कर सके और 15 साल से सत्ता में बनी पार्टी का वर्चस्व कायम रख सकें। राजनीतिक हलकों में उम्मीदवार चयन की इस प्रक्रिया को सत्तारूढ़ दल की एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
पार्टी को ऐसे समय में अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाना है, जब सत्ता विरोधी लहर और चुनाव से पहले मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर बदलते राजनीतिक और चुनावी विमर्श चुनावी परिदृश्य को जटिल बना रहे हैं। राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में होना निर्धारित है।
सत्तारूढ दल ने अब तक उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं की है। लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता हासिल करने के लिए अपनी चुनावी रणनीति में शायद बदलाव करने जा रही हैं। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 294 में से 215 सीटें जीती थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 77 सीटें मिली थीं।
हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनाव में उम्मीदवारों की सूची में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, खासकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में जहां पार्टी को 2021 में हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा जिन सीटों पर पार्टी जीती थी, वहां भी कुछ मौजूदा विधायकों को बदला जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व कुछ मामलों में उम्मीदवारों को एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे में स्थानांतरित करने पर भी विचार कर रहा है, विशेष रूप से वहां जहां अनुभवी नेताओं को राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण सीटों पर उतारा जा सकता है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया कई राजनीतिक समीकरणों के आधार पर तय की जा रही है।
इनमें मौजूदा विधायकों का प्रदर्शन, उनकी कथित ‘जीतने की क्षमता’, संगठन में युवा चेहरों को शामिल करने की आवश्यकता और लंबे समय से पद पर बने विधायकों के खिलाफ पैदा हो रही उदासीनता या असंतोष से निपटने की चुनौती प्रमुख हैं। यह पूरी कवायद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
इस प्रक्रिया के तहत लगभग 64 लाख नाम हटाए गए हैं, जबकि करीब 60 लाख नामों की जांच जारी है। यह मुद्दा राज्य में एक विवादास्पद राजनीतिक विषय बन गया है और कई निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी अभियान के विमर्श को प्रभावित कर रहा है।पार्टी के सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर मिले फीडबैक, आंतरिक सर्वेक्षणों और संगठनात्मक रिपोर्टों का विश्लेषण कर रहा है।
ताकि यह तय किया जा सके कि किन मौजूदा विधायकों को बरकरार रखा जाए और किन सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया जाए। ऐसी स्थिति में खासकर उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां किसी विधायक के खिलाफ असंतोष सामने आया है।
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस मजबूत होकर उभरेगी : जी ए मीर
कांग्रेस महासचिव जी.ए. मीर ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस एक मजबूत ताकत के रूप में उभरेगी, और परिणाम घोषित होने के बाद पार्टी की सरकार गठन में अहम भूमिका होगी। मीर ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में पत्रकारों से कहा कि पार्टी पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन करेगी। उस वक्त कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘पिछली बार हमें (पश्चिम बंगाल में) केवल 4.5 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन इस बार हमें 15 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने की उम्मीद है। पिछली बार हम एक भी सीट नहीं जीत पाए थे, लेकिन इस बार अगर ईश्वर की कृपा रही और बंगाल की जनता ने समर्थन दिया तो हमें अच्छी और सम्मानजनक संख्या में सीटें मिलेंगी।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिणाम आने के बाद बंगाल में कांग्रेस के समर्थन के बिना सरकार गठन संभव नहीं होगा। मीर ने कहा, ‘‘आज की तारीख में हम यह नहीं कहेंगे कि हमें सीधे 148 सीटें मिलेंगी, लेकिन हम एक मजबूत पार्टी के रूप में उभरेंगे। मुझे लगता है कि कांग्रेस के समर्थन के बिना कोई सरकार नहीं बनेगी।’’