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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026ः जनता उन्नयन पार्टी का गठन, बेलडांगा और रेजीनगर सीटों से चुनाव लड़ेंगे हुमायूं कबीर

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 22, 2025 20:14 IST

West Bengal Assembly Elections 2026: भरतपुर के विधायक कबीर ने कहा कि मुर्शिदाबाद की दो सीट, रेजिनगर और बेलडांगा से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

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ठळक मुद्देWest Bengal Assembly Elections 2026: जनता उन्नयन पार्टी नामक एक नयी पार्टी का गठन किया।West Bengal Assembly Elections 2026: नयी पार्टी राज्य में 2026 के विधानसभा चुनावों में उतारेगी। West Bengal Assembly Elections 2026: मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की शैली जैसी मस्जिद की आधारशिला रखी थी।

बेलडांगाः मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की आधारशिला रखने पर तृणमूल कांग्रेस द्वारा निलंबित किए जाने के कुछ दिनों बाद, पश्चिम बंगाल के विधायक हुमायूं कबीर ने सोमवार को जनता उन्नयन पार्टी नामक एक नई पार्टी का गठन किया। कबीर ने बेलडांगा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आठ उम्मीदवारों के नाम बताए जिन्हें उनकी नई पार्टी राज्य में 2026 के विधानसभा चुनावों में उतारेगी। भरतपुर के विधायक कबीर ने कहा कि वह मुर्शिदाबाद की दो सीट, रेजिनगर और बेलडांगा से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "हम आपको बाद में ही बता पाएंगे कि हम अंततः कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।" कबीर ने कहा कि उनका लक्ष्य विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करना है। राज्य में विधानसभा चुनाव होने में छह महीने से भी कम समय बचा है। उन्होंने आरोप लगाया, "ममता बनर्जी अब वैसी नहीं रहीं जैसी मैं उन्हें जानता था।

वह आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं।" भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया कि कबीर तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने में मदद करने के लिए काम कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने दावा किया, “आगामी विधानसभा चुनावों में कबीर कोई निर्णायक भूमिका नहीं निभाएंगे।

उन्हें अपने पुराने मित्र तृणमूल कांग्रेस के साथ करारी हार का सामना करना पड़ेगा, जिसके साथ वह अब भी गुप्त रूप से संपर्क में हैं। बंगाल की जनता कबीर और उनकी नई पार्टी-दोनों को ही खारिज कर देगी।” उन्होंने दावा किया कि कबीर विधानसभा चुनावों में "भाजपा के वोटों को बांटने" की कोशिश कर रहे हैं।

भट्टाचार्य ने दावा किया, "बांग्लादेश की स्थिति के मद्देनजर, बंगाल के लोग कबीर के प्रयासों को विफल करेंगे और भाजपा जैसी एक मजबूत राष्ट्रवादी ताकत को चुनेंगे, केवल वह ही कट्टरपंथियों को हरा सकती है।" कबीर की नई पार्टी पर तृणमूल कांग्रेस ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है। बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद बनाने की कबीर की घोषणा के बाद मचे बवाल के बीच तृणमूल कांग्रेस ने चार दिसंबर को उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। छह दिसंबर को कबीर ने रेजिनगर में मस्जिद की नींव रखी थी। छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया गया था।

कबीर का पिछले 10 वर्षों में राज्य की लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों से संबंध रहा है। साल 2015 में, उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने छह साल के लिए पार्टी से "निष्कासित" कर दिया था, क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की थी और आरोप लगाया था वह पार्टी प्रमुख अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को ‘राजा’ बनाने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने 2016 के विधानसभा चुनाव में रेजिनगर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी से हार गए। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए, जिसकी उस समय जिले में काफी मजबूत उपस्थिति थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए।

भाजपा ने उन्हें मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया और वह तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बाद तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद वह तृणमूल कांग्रेस में वापस लौट आए और 2021 में भरतपुर से विधायक बने।

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में भारी त्रुटियां कीं: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला करते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य में मतदाता सूचियों की अब तक की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में ‘‘भारी त्रुटियां’’ हुई हैं। बनर्जी ने यहां नेताजी इनडोर स्टेडियम में तृणमूल कांग्रेस के बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग राज्य सरकार को सूचित किए बिना पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर रहा है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हितों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।

निर्वाचन आयोग केवल भाजपा के निर्देशों पर काम कर रहा है। बनर्जी ने कहा कि राज्य में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान ‘‘भारी त्रुटियां’’ हुई हैं। तृणमूल प्रमुख ने यह भी दावा किया कि एसआईआर सुनवाई के लिए सूक्ष्म पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किए गए केंद्रीय अधिकारियों को स्थानीय भाषा का बहुत कम ज्ञान है और वे पुनरीक्षण प्रक्रिया के दूसरे चरण के दौरान सत्यापन करने के लिए अयोग्य हैं।

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