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उत्तर प्रदेश राजनीतिः बसपा के बाद कांग्रेस और अब सपा?, 15 फरवरी को अखिलेश यादव के साथ साइकिल दौड़ाएंगे नसीमुद्दीन सिद्दीकी?

By राजेंद्र कुमार | Updated: February 14, 2026 19:03 IST

Uttar Pradesh Politics 2026-2027: सपा मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी अपने परिवार और राजनीतिक साथियों के साथ 15 फरवरी को सपा में शामिल होंगे.

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ठळक मुद्देUttar Pradesh Politics 2026-2027: समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल होने का फैसला किया है.Uttar Pradesh Politics 2026-2027: परिवारजनों और मित्रों के साथ रविवार को वह सपा में शामिल होंगे.Uttar Pradesh Politics 2026-2027: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में जाने के बजाय सपा के साथ खड़े होना पसंद किया है.

लखनऊः उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके पहले ही प्रदेश के दिग्गज नेता अपने लिए सुरक्षित राजनीतिक ठिकाना खोजने में जुट गए हैं. ऐसे दिग्गज नेताओं में गत 24 जनवरी को कांग्रेस छोड़ने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी हैं. कांग्रेस में आठ साल बिताने के बाद अब उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल होने का फैसला किया है.

अब सपा मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी अपने परिवार और राजनीतिक साथियों के साथ 15 फरवरी को सपा में शामिल होंगे. नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके राजनीतिक साथियों को सपा में शामिल करके अखिलेश यादव रविवार को लखनऊ में यह मैसेज देंगे कि यूपी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की योगी सरकार को हराने के लिए लोग उनके साथ जुड़ने लगे हैं. इसी लिए कांग्रेस से नाता तोड़ने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी पुरानी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में जाने के बजाय सपा के साथ खड़े होना पसंद किया है.

हालांकि बसपा में उन्हे शामिल कराने के लिए कई बसपा नेता उन्हे मनाने में जुटे थे, लेकिन उन्होने बसपा में शामिल होने की अटकलों को खत्म करते हुए नसीमुद्दीन ने यह ऐलान कर दिया है कि अपने परिवारजनों और मित्रों के साथ रविवार को वह सपा में शामिल होंगे.

बसपा छोड़ी, कांग्रेस में गए अब सपा में होंगे शामिल

उत्तर प्रदेश ही राजनीति में नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा के कद्दावर नेता माने जाते रहे हैं. बसपा के संस्थापक कांशीराम ने उन्हे पार्टी में शामिल किया था. बांदा के रहने वाली नसीमुद्दीन सिद्दीकी वर्ष 1991 में पहली बार बांदा विधानसभा से चुनाव जीते थे. राज्य में बनी बसपा की सभी सरकारों में वह मंत्री बने. उन्हे बसपा मुखिया मायावती का करीबी माना जाता था.

वर्ष 2007 में बनी मायावती की सरकार में 18 विभागों के मंत्री थे. बसपा में टिकट बंटवारे से लेकर पार्टी के वित्तीय मामलों में उनका दखल रहता था. बसपा से बाबू सिंह कुशवाहा के जाने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी  को मिनी सीएम तक कहा जाने लगा था. कुछ लोग उन्हे बसपा का फंड मैनेजर भी कहते थे. मायावती ने उनकी पत्नी को एमएलसी बनाया था और बेटे को भी चुनाव मैदान में उतारा था.

वर्ष 2012 से 2017 तक वह विधान परिषद में पार्टी ने नेता रहे, लेकिन वर्ष 2017 में मायावती से हुई  अनबन की वजह से उन्हें बसपा से हटना पड़ा. इसके बाद नसीमुद्दीन ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. करीब आठ साल कांग्रेस में रहे. कांग्रेस में उन्हे पश्चिम क्षेत्र का अध्यक्ष भी बनाया, लेकिन कांग्रेस में कोई करिश्मा कर पाए. हालांकि बीते लोकसभा चुनाव में बिजनौर लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने चुनाव भी लड़ा था, लेकिन इस चुनाव में वह अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए.

इसके बाद से पार्टी में उनकी महत्व मिलना कम हो गया तो बीती 24 जनवरी को नसीमुद्दीन ने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया. कांग्रेस छोड़ने की वजह उन्होने यह बताई की कांग्रेस में उनकी संगठनात्मक क्षमता का कोई प्रयोग नहीं किया जा रहा है. उनके कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय उन्हें मनाने घर भी गए, लेकिन बात नहीं बनी.

इसलिए सपा से नाता जोड़ रहे नसीमुद्दीन

नसीमुद्दीन के नजदीकी नेताओं के अनुसार, कांग्रेस से अलग होने के बाद नसीमुद्दीन ने मायावती की तारीफ कर पुरानी पार्टी में वापसी का मन बनाया, लेकिन मायावती ने उनको लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. हालांकि बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र के जरिए उनको और स्वामी प्रसाद मौर्य को फिर बसपा में शामिल किए जाने की कोशिश शुरू की गई थी और नसीमुद्दीन बसपा से नाता तोड़ने के लिए अपनी गलती भी मानने को तैयार थे, लेकिन मायावती ने उन्हे बसपा में वापस लेने से मना कर दिया.

मायावती का कहना था कि उनका अपमान करने वाले किसी नेता की बसपा में वापसी का गलत संदेश जाएगा. मायावती के इस फैसले के बाद नसीमुद्दीन ने ओवैसी और नगीना सांसद चंद्रशेखर तथा  पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य से मिलकर एक मोर्चा बनाने की संभावनाओं को तलाशा लेकिन उनके राजनीतिक साथियों ने सपा के साथ जाने का सुझाव दिया.

इसके बाद ही नसीमुद्दीन ने सपा में जाने का फैसला किया और सपा  मुखिया अखिलेश यादव के व्यवहार की तारीफ. और सपा के नेताओं से संपर्क किया. कहा जा रहा है कि यूपी में राजनीति में नसीमुद्दीन को अपना भविष्य सपा में ही दिख रहा है. सपा उनके बेटे को भी चुनाव मैदान में उतार सकती है. इसलिए चलते ही नसीमुद्दीन और मायावती सरकार में मंत्री रहे अनीस अहमद रविवार को सपाई बन जाएंगे. पार्टी में नसीमुद्दीन का कद बढ़ाने के लिए ज्वाइनिंग के समय अखिलेश यादव भी रहेंगे. 

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