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उत्तर प्रदेश पुलिस ने मदरसा में घुसकर छात्रों को पीटा, उन्हें 'जय श्री राम' बोलने के लिए किया मजबूर: रिपोर्ट

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 6, 2020 12:07 IST

विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 20 दिसंबर को मदरसा कॉप्लेक्स में घुस गई। इस दौरान पुलिस ने वहां मौजूद छात्रों के साथ मारपीट की और उन्हें “जय श्री राम” बोलने के लिए मजबूर किया। यही नहीं उन लोगों को पुलिस ने कई बार आतंकवादी भी कहा है।

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ठळक मुद्देवरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने आरोपों से इनकार किया।21 वर्षीय इरफान हैदर, एक छात्र था, जो 20 दिसंबर को हिरासत में लिया गया था और एक दिन बाद 11 बजे रिहा कर दिया।

मुजफ्फरनगर मदरसे के छात्रों ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर आरोप लगाया है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ कस्बे में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 20 दिसंबर को मदरसा कॉप्लेक्स में घुस गई। इस दौरान पुलिस ने वहां मौजूद छात्रों के साथ मारपीट की और उन्हें “जय श्री राम” बोलने के लिए मजबूर किया। यही नहीं उन लोगों को पुलिस ने कई बार आतंकवादी भी कहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसा चलाने वाले 68 वर्षीय मौलाना असद रज़ा हुसैनी ने कहा कि वह उन लोगों में से थे, जिनकी पुलिस ने पिटाई की।  उन्होंने कहा, "पुलिस मुझे कुछ बोले बगैर मारने लगे। मैं गिर गया और मुझे बचाने के लिए कोई छात्र मेरे उपर गिर गए।

उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगा कि मैं जीवित हूं लेकिन भगवान ने मुझे बचा लिया। मैंने आजतक ऐसा नहीं देखा, दंगों (2013) के दौरान भी नहीं। ” बता दें कि उनके दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गई है और उनकी बांयी बांह पर पट्टियां हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने आरोपों से इनकार किया। यादव ने कहा कि छात्रों और अन्य लोगों को "जय श्री राम" का जाप करने के लिए मजबूर करने के आरोप झूठे हैं।

यादव ने कहा, "ऐसी बात नहीं है।" मारपीट के आरोपों पर उन्होंने कहा, “हमें लाठीचार्ज करना पड़ा क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने मदरसे में प्रवेश किया था, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अफवाहें फैलाई जा रही हैं। ” 

यादव ने कहा कि 20 दिसंबर को कई प्रदर्शनकारी कथित तौर पर मदरसा परिसर में घुस आए थे। उन्होंने कहा, 'हमने सभी में 75 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें से 28 छात्रों को उसी दिन छोड़ दिया गया था। कल, 10 अन्य, जिन्हें हमने पाया कि वे सिर्फ विरोध का हिस्सा थे, उन्हें जमानत दी गई क्योंकि उनपर कोई भी हिंसा का आरोप नहीं पाया गया था।

एसएसपी ने कहा कि मौलाना के बेटे, मोहम्मद हुसैनी ने रविवार को एक प्रेस बयान जारी कर पुलिस हिंसा या दूसरे आरोपों का खंडन किया था। 

हालांकि, हुसैनी ने कहा, “मैंने केवल मलाशय से खून बहने और मीडिया द्वारा किए गए ऐसे अन्य दावों की झूठी खबरों का खंडन किया है।" उन्होंने कहा कि मैंने पुलिस द्वारा किए गए मारपीट के दावों को खारिज नहीं किया है। 

उन्होंने कहा कि कई नाबालिगों के साथ मारपीट की गईं और उनमें से कुछ को तो रक्तस्राव पीड़ित हो गए।

21 वर्षीय इरफान हैदर, एक छात्र था, जो 20 दिसंबर को हिरासत में लिया गया था और एक दिन बाद 11 बजे रिहा कर दिया। उसने आरोप लगाया कि वर्दी पहने 150 से अधिक पुलिसकर्मी उस दिन लगभग 3.45 बजे मदरसे में दाखिल हुए।

हैदर ने कहा, “उन्होंने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, दरवाजे खोल दिए और हमें लाठियों से मारना शुरू कर दिया। हमें घेर लिया गया और पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहाँ हमें बंदूक की बट से मारा गया था।”

उन्होंने कहा, उनके दाहिने हाथ और पैर में नर्सिंग फ्रैक्चर हैं। उसने कहा कि आधी रात के आसपास (20 दिसंबर को) उन्होंने हम पांच लोगों को सिर्फ एक ग्लास पानी दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पुलिस ने हमें जय श्री राम का जाप करने के लिए भी मजबूर किया।” 

नाम न छापने की शर्त पर बात करने वाले एक 59 वर्षीय सरकारी कर्मचारी ने कहा कि वह 20 दिसंबर को कैंपस की मस्जिद में नमाज अदा करने आया था जब उसे पुलिस ने पकड़ लिया था। उन्होंने कहा, "जय श्री राम के बोलने के लिए पुलिस ने कहा मैनें यही किया। हमारी फिर भी पिटाई की गई। मैं रात को सो नहीं पा रहा था और तब से काम पर नहीं गया हूं।”

    

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