नई दिल्लीः दुनिया भर के कई देश में भारतीय लोग हैं। इस बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ईरान में 9000 भारतीय हैं और एडवाइजरी के बाद कई स्वदेश लौट गए हैं। भारतीय दूतावास ने बताया कि कतर में फंसे 500 से अधिक भारतीयों को नयी दिल्ली और अन्य स्थानों पर पहुंचाया गया है। दूतावास ने पश्चिम एशियाई देश में अब भी फंसे लोगों को किसी भी अज्ञात वस्तु, मलबे या टुकड़ों के पास जाने के खिलाफ चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से संबंधित संभावित व्यवधानों को लेकर चिंताओं के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से तीन बार बातचीत की।
गैर-ईरानी कच्चे तेल को ले जाने वाला पहला तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल चुका है। 1 मार्च को, 'शेनलॉन्ग' नामक टैंकर सऊदी अरब के सबसे बड़े तेल निर्यात टर्मिनल रास तनुरा में तेल से भरा गया था। यह टैंकर 10 मार्च को भारत के मुंबई पहुंचा। जायसवाल ने कहा, "विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है।
पिछली बातचीत में शिपिंग की सेफ्टी और इंडिया की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों पर बात हुई थी। इसके अलावा मेरे लिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।" पाकिस्तान पर MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम ऐसे बेबुनियाद आरोपों को खारिज करते हैं। पाकिस्तान के लिए अपनी गलतियों के लिए भारत पर इल्ज़ाम लगाना अब आम बात हो गई है।
दशकों से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के तौर पर, जब बॉर्डर पार आतंकवाद की बात आती है तो पाकिस्तान की कोई साख नहीं है। कितनी भी कहानी सुनाने से यह सच्चाई नहीं बदलेगी और न ही पाकिस्तान के खुद को पीड़ित समझने से कोई बेवकूफ बनेगा।" लड़ाई शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री ने खाड़ी के कई नेताओं से बात की है।
इन बातचीत में, उन्होंने बातचीत और कूटनीति की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ताकि जल्दी शांति लौट सके। उन्होंने आम लोगों की मौत से बचने की जरूरत पर भी ज़ोर दिया और आम लोगों की सुरक्षा पर ध्यान दिया। GCC देशों में हमारी एक बड़ी भारतीय कम्युनिटी है और उनकी सुरक्षा और भलाई सबसे ज़रूरी है।
हमारे विदेश मंत्री अपने ईरानी काउंटरपार्ट से बात कर रहे हैं और पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत हुई है। जहां तक युद्ध के असर की बात है, तो यह सबके सामने है कि आस-पास क्या हो रहा है। हम में से कई लोगों की ज़िंदगी पर इसका असर पड़ा है, सिर्फ हमारी ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों और देशों पर इसका असर पड़ा है।
इराक के पास अमेरिकी स्वामित्व वाले तेल टैंकर पर ‘‘आत्मघाती’’ नौका से किए गए ईरान के हमले में एक भारतीय नागरिक के मारे जाने की सूचना है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों एवं जॉर्डन के खिलाफ ईरान द्वारा किए गए ‘‘भीषण’’ हमलों की निंदा की गई है, सभी ईरानी हमलों को तत्काल रोके जाने की मांग की गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों की भी निंदा की गई है।