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गुजरात की दो अदालतों ने राहुल गांधी को समन जारी किए, शाह के खिलाफ टिप्पणी का है मामला

By भाषा | Updated: July 9, 2019 22:25 IST

भाजपा नेताओं ने शिकायतें दायर कर राहुल गांधी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कथित तौर पर ‘‘हत्या का आरोपी’’ बताया था।

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गुजरात की दो अदालतों ने भाजपा नेताओं द्वारा दायर आपराधिक मानहानि की शिकायतों पर मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को समन जारी किये। भाजपा नेताओं ने शिकायतें दायर कर राहुल गांधी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कथित तौर पर ‘‘हत्या का आरोपी’’ बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि ‘‘सभी चोरों का उपनाम मोदी है।’’

सूरत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बी एच कपाड़िया ने गांधी को 16 जुलाई को पेश होने के लिए जबकि अहमदाबाद की अदालत ने कांग्रेस नेता को नौ अगस्त को पेश होने के आदेश दिये। इन दोनों मामलों में अदालतों ने गांधी को समन जारी किये।

सूरत की अदालत मंगलवार को भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी की शिकायत पर सुनवाई कर रही थी जिन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता ने लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान दिये अपने बयान से पूरे मोदी समुदाय को बदनाम किया है। पुर्णेश मोदी सूरत-पश्चिम से विधायक हैं।

अहमदाबाद में, अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट डी एस डाभी ने गांधी को फिर से समन जारी किया। इससे पहले एक मई को जारी समन वापस आ गया था। यह समन लोकसभा अध्यक्ष के जरिये भेजा गया था क्योंकि राहुल संसद सदस्य हैं। शिकायतकर्ता के वकील प्रकाश पटेल ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने समन यह कहते हुए वापस भेज दिया कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है।

राहुल से नौ अगस्त को पेश होने के लिए कहने वाले नये समन को सीधे कांग्रेसी नेता के नयी दिल्ली स्थित आवास पर भेजा जाएगा। इससे पहले अदालत ने कहा था कि राहुल के खिलाफ पहली नजर में भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत आपराधिक मानहानि का मामला बनता है।

स्थानीय भाजपा पार्षद कृष्णवादन ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया है कि राहुल ने 23 अप्रैल को जबलपुर में एक चुनावी रैली में आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि राहुल की टिप्पणी मानहानिपूर्ण है क्योंकि शाह को सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में 2015 में सीबीआई अदालत बरी कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि न तो उच्च न्यायालय और न ही उच्चतम न्यायालय ने शाह को बरी किये जाने को चुनौती वाली याचिका स्वीकार की थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि शाह को बरी करने वाले सीबीआई अदालत के दो जनवरी 2015 के आदेश ने बहुत चर्चा बटोरी थी और इसके बारे में ‘‘कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों को’’ पूरी जानकारी है।

एक रैली में राहुल की टिप्पणी के बाद, शाह ने उन पर पलटवार करते हुए कहा था कि वह इस मामले में बरी हो चुके हैं। उन्होंने राहुल की ‘‘कानूनी समझ’’ पर सवाल खड़े किये थे। साल 2015 में, एक विशेष अदालत ने सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ मामलों में शाह को आरोप मुक्त करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है और उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है।

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