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रास में शून्यकाल के आखिर में TMC सदस्यों ने किया बायकॉट

By भाषा | Updated: February 4, 2020 15:38 IST

शून्यकाल के तहत निर्भया मामले के दोषियों को फांसी में विलंब, कोरोना वायरस, कुछ राज्यों में फसलों पर टिड्डी दल के हमले, दक्षिण भारत में उच्चतम न्यायालय की पीठ से लेकर प्याज के निर्यात सहित विभिन्न मुद्दे सदस्यों ने उठाए।

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ठळक मुद्देकांग्रेस तथा वाम दलों के सदस्यों ने भी सीएए तथा एनआरसी पर चर्चा की अनुमति दिए जाने की मांग की। शून्यकाल के आखिर में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बायकॉट किया।

राज्यसभा में मंगलवार को संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा किए जा रहे हंगामे के बीच शून्यकाल के तहत, लोकमहत्व से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए। हालांकि शून्यकाल के आखिर में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बायकॉट किया। गौरतलब है कि संसद के बजट सत्र की 31 जनवरी से शुरुआत होने के बाद आज पहली बार उच्च सदन में शून्यकाल चला, वह भी हंगामे के बीच। शून्यकाल के तहत निर्भया मामले के दोषियों को फांसी में विलंब, कोरोना वायरस, कुछ राज्यों में फसलों पर टिड्डी दल के हमले, दक्षिण भारत में उच्चतम न्यायालय की पीठ से लेकर प्याज के निर्यात सहित विभिन्न मुद्दे सदस्यों ने उठाए।

उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने सदस्यों से शून्यकाल के तहत मुद्दे उठाने को कहा। तृणमूल कांग्रेस सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करने के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिया है। ब्रायन ने कहा कि सीएए को लेकर पूरा देश आंदोलित है और यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है। कांग्रेस तथा वाम दलों के सदस्यों ने भी सीएए तथा एनआरसी पर चर्चा की अनुमति दिए जाने की मांग की।

सभापति नायडू ने कहा ‘‘मैं कल ही व्यवस्था दे चुका हूं। राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदस्य अपने अपने मुद्दे उठा सकते हैं। अभिभाषण और धन्यवाद प्रस्ताव दोनों ही महत्वपूर्ण हैं और सदस्यों को इस पर चर्चा के दौरान अपने अपने मुद्दे उठाने का पूरा मौका मिलेगा।’’ इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अपनी मांग के समर्थन में नारे लगाते हुए आसन के समक्ष आ गए। सभापति ने सदस्यों से शांत रहने की अपील की और शून्यकाल के तहत सूचीबद्ध मुद्दे उठाने के लिए सदस्यों के नाम पुकारे। कुछ सदस्यों ने अपने अपने मुद्दे उठाए।

नारेबाजी कर रहे सदस्यों ने कुछ देर तक तालियां बजा कर भी विरोध जताया। इस पर सभापति नायडू ने आपत्ति जताते हुए कहा ‘‘यह राज्यसभा है। यह उच्च सदन है, बाजार नहीं है।’’ हंगामे के बीच ही शून्यकाल चला। आखिर में तृणमूल कांग्रेस के सदस्य नाराजगी जाहिर करते हुए सदन से बाहर चले गए। 

 

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