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बिहार में पुलों के गिरने का सिलसिला नहीं ले रहा है रुकने का नाम, एक हफ्ते के अंदर ध्वस्त हुआ तीसरा पुल

By एस पी सिन्हा | Updated: June 23, 2024 15:14 IST

प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस पुल का निर्माण धीरेंद्र कंस्ट्रक्शन प्रा. लिमिटेड श्रीकृष्णनगर द्वारा कराया जा रहा था। निर्माणाधीन पुल गिरने को लेकर निर्माण कंपनी के मुंशी ने कहा है कि पुल गिरा नहीं बल्कि गिराया गया है।

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पटना: बिहार में पुलों के गिरने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अररिया और सीवान के बाद अब मोतिहारी के घोड़ासहन ब्लॉक में पुल गिरने की घटना हुई है। निर्माणाधीन पुल ध्वस्त होने की यह हफ्ते भर के अंदर तीसरी घटना है। यहां घोड़ासहन प्रखंड के अमवा से चैनपुर स्टेशन जाने वाली सड़क में पुल बन रहा था। इस पुल की लंबाई लगभग 40 फिट थी और इसे लगभग 1.50 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा था। पुल की ढलाई का काम शनिवार को ही हुआ था। इसके बाद रात में अचानक पुल भरभरा कर गिर गया। रविवार की सुबह जब गांव के लोगों की नजर इस पर पड़ी तो खबर आग की तरह फैल गई। 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस पुल का निर्माण धीरेंद्र कंस्ट्रक्शन प्रा. लिमिटेड श्रीकृष्णनगर द्वारा कराया जा रहा था। निर्माणाधीन पुल गिरने को लेकर निर्माण कंपनी के मुंशी ने कहा है कि पुल गिरा नहीं बल्कि गिराया गया है। उसने कहा कि पुल की ढलाई का काम देर रात तक चला था। ढलाई के बाद रात को मोटरसाइकिल से एक युवक आया और उसने पुल के एक पाया को हिलाया था, जिस कारण पुल ध्वस्त हो गया। 

बता दें कि इस हफ्ते में यह तीसरा पुल है जो कि गिरा है। इससे सवाल उठने लगे हैं कि एक महीने के अंदर तीन पुल कैसे गिर सकते हैं? अब बिहार में पुलों के निर्माण की गुणवत्ता पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसके पहले इसी सप्ताह अररिया और सीवान में दो अलग अलग पुल गिर चुके हैं। शनिवार को सीवान में एक पुल गिरने की घटना हुई थी। इस घटना पर जिलाधिकारी मुकुल कुमार गुप्ता ने कहा था कि यह पुल बहुत पुराना था। नहर से पानी छोड़े जाने पर खंभे ढह गए। 

इससे पहले अररिया में लगभग 180 मीटर लंबा एक नवनिर्मित पुल ढह गया था। अररिया के सिकटी में बकरा नदी पर यह पुल बनाया गया था। इस पुल का उद्घाटन किया जाना था, लेकिन इससे पहले ही पुल धड़ाम से गिर गया। वहीं लगातार टूटते पुलों पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बड़ा अजीबो-गरीब बयान देते हुए कहा कि जो पुल टूटे हैं, वह पथ निर्माण विभाग के नहीं है और ना ही ग्रामीण कार्य विभाग के हैं। 

उन्होंने कहा कि जो पुल टूट कर पानी में बह गए हैं, वह 35-40 साल पुराने हैं। उनके बयान के मुताबिक, करोड़ों रुपये खर्च करके बने पुलों की मियाद सिर्फ 30-35 साल ही होती है। जबकि देश में अभी भी अंग्रेजों के बनाए कई ब्रिज पूरी मजबूती के साथ खड़े हैं।

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