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कश्मीर में हंगुल मृग की संख्या बढ़ने के आसार, वन विभाग ने किया दावा

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: March 28, 2023 14:02 IST

वर्ष 2017 में वैज्ञानिकों ने एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल की जब उन्होंने जानवरों की प्रजातियों के अस्तित्व के लिए प्रबंधन हस्तक्षेपों का समर्थन करने के लिए उनके जीव विज्ञान, व्यवहार और पारिस्थितिकी को समझने के लिए गंभीर रूप से लुप्तप्राय हंगुल पर एक उपग्रह कालर लगाया था।

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ठळक मुद्दे हंगुल एक बहुत ही शर्मीला और मायावी जानवर माना जाता है कश्मीर में हंगुल अर्थात कश्मीरी हिरण की संख्या में बढ़ोतरी हुई हैअवैध शिकार के कारण ये लुप्त प्रजाति की श्रेणी में आ गए थे

श्रीनगर:जम्मू कश्मीर से एक और खुशी वाली खबर सामने आई है। यहां शर्मिले जानवर हंगुल अर्थात कश्मीरी हिरण की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसका दावा वाइल्ड लाइफ विभाग के अधिकारियों ने किया है जिन्होंने बताया कि 300 के करीब लोगों ने उनकी जनगणना प्रोजेक्ट में शिरकत की।

हालांकि, विभाग के अधिकारियों का कहना था कि इनकी बढ़ी हुई संख्या के आंकड़े अगले कुछ दिनों में जारी किए जाएंगें। वर्ष 2009 में इनकी संख्या 175 तक सिमट गई थी।

कभी इनकी संख्या 500 के पार बताई जाती रही थी। हालांकि, वाइल्ड लाइफ विभाग के प्रयास ही थे कि वर्ष 2019 में इनकी संख्या 237 तक पहुंच गई थी तो फिर 2021 में इनके कुनबे में 263 हिरण शामिल हो गए थे।

कश्मीर के दाचीगाम वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में विचरण करने वाले हिरण कभी अवैध शिकार को भी झेल चुके हैं। अब इनके प्रजनन को भी कई प्रोजेक्ट चालू किए गए हैं। इस महीने 15 मार्च से 20 मार्च के 6 दिनों के जनगणना कार्यक्रम में कई एनजीओ सदस्य, वाइल्ड लाफ अधिकारी और विशेषज्ञों के अतिरिक्त छात्र भी इसमें शामिल हुए थे।

अधिकारियों ने बताया कि 2021 की जनगणना के अनुसार, कश्मीर में हंगुल की आबादी 263 थी। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 2019 में हंगुल की आबादी 237 थी, जो 2017 की जनगणना से अधिक है। 2017 में, हंगुल की आबादी 214 थी। इससे पहले, हंगुल की गिनती क्रमशः 2009, 2011 और 2015 में 175, 218 और 186 थी।

जानकारी के के अनुसार, हंगुल एक बहुत ही शर्मीला और मायावी जानवर माना जाता है जिसे जंगल में पहचानना बहुत मुश्किल है।

वर्ष 2017 में वैज्ञानिकों ने एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल की जब उन्होंने जानवरों की प्रजातियों के अस्तित्व के लिए प्रबंधन हस्तक्षेपों का समर्थन करने के लिए उनके जीव विज्ञान, व्यवहार और पारिस्थितिकी को समझने के लिए गंभीर रूप से लुप्तप्राय हंगुल पर एक उपग्रह कालर लगाया था।

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि जम्मू कश्मीर में 15,806.75 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क के अंतर्गत है, जिसमें पांच राष्ट्रीय उद्यान, 14 वन्यजीव अभयारण्य और 37 संरक्षण रिजर्व शामिल हैं।

ताजा सर्वेक्षण दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान में वर्तमान जनसंख्या का पता लगाने के अलावा अवशेष आवासों में हंगुल की आबादी के वितरण और प्रवृत्ति को भी बताएगा। अधिकारियों ने कहा कि यह हंगुल संरक्षण योजना के क्रियान्वयन की योजना बनाने में उपयोगी होगा।

वे इस बात पर खुशी जाहिर करते थे कि पिछले कुछ वर्षों से जनसंख्या में वृद्धि हो रही है और इस साल उनकी आबादी में जबरदस्त इजाफा होने का दावा किया गया है।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरJammuForest Department
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