पटना: बिहार में पत्रकारों को पेंशन देने का मामला भी विधानसभा में उठा। विधायक अजय कुमार के द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि अन्य राज्यों के अनुसार बिहार में सरकार की पत्रकार पेंशन योजना है, जिसमें 20 वर्ष की सेवा अवधि वाले पत्रकारों को पेंशन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के लिए फैमिली पेंशन योजना भी बिहार में लागू की गई है जो दूसरे किसी राज्य में नहीं है। मिनिमम सेवा शर्त जो बनाई गई है उसका पालन करना होगा।
विजय चौधरी ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पेंशन की व्यवस्था केवल बिहार तक सीमित नहीं है। देश के कई राज्यों में पत्रकारों के लिए पेंशन योजना लागू है और इसके नियम लगभग एक जैसे ही निर्धारित किए गए हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य लंबे समय तक मीडिया जगत में अपनी सेवाएं देने वाले पत्रकारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
पत्रकार पेंशन योजना के तहत सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि संबंधित पत्रकार के पास कम से कम 20 वर्षों का कार्य अनुभव होना चाहिए। यह नियम लगभग हर राज्य में लागू है और इसे योजना का मूल आधार माना जाता है। सरकार का मानना है कि पत्रकारिता जैसे चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदार पेशे में लंबे समय तक काम करने वाले पत्रकारों को उनके अनुभव और योगदान के आधार पर सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
पेंशन के लिए आवेदन करने वाले पत्रकारों को अपनी सेवा अवधि का प्रमाण भी देना होता है। इसके लिए पीएफ (भविष्य निधि) और टीडीएस (कर कटौती) जैसे दस्तावेजों को प्रमाण के तौर पर देखा जाता है। इन दस्तावेजों से यह साबित होता है कि संबंधित पत्रकार किसी संस्थान में नियमित रूप से कार्यरत रहा है और उसकी सेवा वास्तविक और प्रमाणिक है। हालांकि, इन दस्तावेजों का उद्देश्य केवल सेवा की पुष्टि करना होता है, जबकि पेंशन के लिए सबसे अहम शर्त 20 वर्षों की सेवा ही मानी जाती है।
विजय चौधरी ने कहा कि सरकार और संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करते हैं कि पेंशन योजना का लाभ केवल उन्हीं पत्रकारों को मिले जिन्होंने लंबे समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। इससे योजना की पारदर्शिता बनी रहती है और पात्र पत्रकारों को ही इसका लाभ मिल पाता है।