पटना: बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर हो रहे चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होते ही बिहार की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। पांचवीं सीट को लेकर सियासी गुणा-गणित ने सियासी सरगर्मी तेज कर दी है। एक जहां चार सीटों पर एनडीए की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, वहीं पांचवी सीट को लेकर राजनीतिक गणित और जोड़ तोड़ का खेल खुलकर सामने आ गया है। सूत्रों के मुताबिक राजद की ओर से तेजस्वी यादव को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि उनकी दावेदारी को लेकर अंदरखाने सहमति बन चुकी है और औपचारिक घोषणा जल्द हो सकती है।
इस बीच राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को पार्टी की अहम बैठक बुलाई है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार 1 मार्च को पार्टी के पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक पार्टी नेता तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में होगी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में संगठनात्मक मुद्दों, आगामी चुनावी रणनीति और संभावित राजनीतिक फैसलों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव में क्या रणनीति हो इस पर भी बड़ी चर्चा होगी।
सूत्रों की मानें तो राज्यसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव को सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों का भी समर्थन मिल सकता है, जिससे राज्यसभा पहुंचने की उनकी राह आसान हो सकती है। हालांकि इसको लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अगर तेजस्वी यादव राज्यसभा जाने में सफल होते हैं तो उनकी मौजूदा विधानसभा सीट राघोपुर खाली हो जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक राघोपुर सीट पर उपचुनाव होने पर तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। पार्टी के अंदर इस संभावना पर चर्चा भी शुरू हो चुकी है। हालांकि राजद की ओर से अब तक किसी भी नाम पर आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राज्यसभा चुनाव और संभावित उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सभी की नजर अब पार्टी की औपचारिक घोषणा पर टिकी हुई है।
वहीं, इस खबर ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। सियासत के जानकारों का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो यह राजद की रणनीतिक चाल मानी जाएगी। एक ओर पार्टी राज्यसभा में अपनी मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करेगी, वहीं दूसरी ओर राघोपुर सीट पर अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करेगी। राघोपुर लंबे समय से राजद का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, इसलिए वहां उम्मीदवार चयन बेहद अहम माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि महागठबंधन संख्या जुटा लेगा और अपना उम्मीदवार उतारकर जीत भी दर्ज करेगा।
बता दें कि विधानसभा में एनडीए के 202 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। इस गणित के हिसाब से एनडीए चार सीटें आसानी से निकाल सकता है। लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे तीन अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी। यही सीट सबसे दिलचस्प बन गई है। 5वीं सीट पर जीत हासिल करने के लिए जहां एनडीए की रणनीतियां जारी है। वहीं राजद ने एक अलग तैयारी शुरू की है। राजद के 25 विधायक हैं। जबकि कांग्रेस के 6, वामदलों के 4 और आईपीपी के 1 विधायक को जोड़कर यह संख्या 35 हो जाती है। वहीं, एआईएमआईएम और बसपा के कुल 6 विधायक हैं। अगर इन सबका साथ तेजस्वी की उम्मीदवारी के बाद मिल जाता है तो यह 41 हो जाएगा।
इस तरह वे आसानी से राज्यसभा चले जाएंगे। सूत्रों के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को मिली करारी हार के बाद अब तेजस्वी ने कुछ अलग करने की योजना बनाई है। इसी को लेकर वे खुद केंद्र की राजनीति में सक्रिय होंगे और इसके लिए राज्यसभा सांसद बनेंगे। यह कुछ वैसा ही होगा जैसे उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सपा के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने खुद को केंद्र की राजनीति में सक्रिय किया था। अब तेजस्वी भी उसी राह पर हो सकते हैं।