Sushil Kumar Modi Dies:बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी के निधन से राजनीतिक गलियारे में मातम पसरा हुआ है। कैंसर की बीमारी से पीड़ित सुशील मोदी के निधन के बाद तमाम नेता उन्हें श्रद्धाजंलि दे रहे हैं। सुशील मोदी के साथ लंबे समय से बिहार राजनीति में काम करने वाले अश्विनी चौबे ने उनके निधन पर दुख जताया। ऑन कैमरा दिवंगत नेता को याद करते हुए देखते ही देखते अश्विनी चौबे भावुक हो गए और फूट-फूट कर रोने लगे।
उन्होंने कहा, “मैंने अपना भाई खो दिया है। वह मेरा मित्र था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे कभी ऐसे दिन का सामना करना पड़ेगा।” एएनआई से बातचीत के दौरान रोते हुए चौबे ने कहा, “मैंने अपना भाई खो दिया है... वह मेरा दोस्त था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतने बुरे दिन का सामना करना पड़ेगा।"
समाचार एजेंसियों द्वारा साझा किए गए एक वीडियो संदेश में रोते हुए अश्विनी चौबे ने कहा, "सुशील कुमार मोदी जी सिर्फ मेरे दोस्त नहीं थे, लेकिन वह मेरा परिवार थे... मैं इसे बयान नहीं कर सकता। जो हमेशा मेरे साथ थे, उन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया और जब भी मुझे जरूरत पड़ी तो मुझे सुझाव दिए। कभी-कभी मैं उन्हें डांट भी देता था।" लेकिन उन्होंने कभी बुरा नहीं माना। सुशील मोदी जी बहुत विनम्र नेता थे। जब भी उन्हें किसी पर गुस्सा आता था तो वे मुझसे कहते थे, 'चौबे जी ये मुझे लगता है कि उस आदमी को।' केंद्रीय मंत्री ने वीडियो में कहा, ''मुझे ऐसा कोई नेता नहीं मिला जो अपनी पार्टी, भाजपा के प्रति समर्पित हो।''
केंद्रीय राज्य मंत्री चौबे ने कहा कि सुशील मोदी जी सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि 55 वर्षों से उनके परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने कहा, "मैंने अपना सबसे अच्छा दोस्त खो दिया है। अत्यंत दुखद, हृदयविदारक। बाबा केदारनाथ उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें। अश्रुपूरित श्रद्धांजलि! शत शत नमन!"
अश्विनी चौबे के अलावा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा नेता के निधन पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार में भाजपा के उत्थान और सफलता में सुशील कुमार मोदी ने अमूल्य भूमिका निभाई है। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, "आपातकाल का पुरजोर विरोध करते हुए उन्होंने छात्र राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वह बेहद मेहनती और मिलनसार विधायक के रूप में जाने जाते थे। उन्हें राजनीति से जुड़े मुद्दों की गहरी समझ थी। प्रशासक के तौर पर भी उन्होंने कई सराहनीय काम किए।"
बता दें कि सुशील मोदी का सोमवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। 72 वर्षीय कैंसर से जूझ रहे थे और उन्हें एम्स की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने नई दिल्ली के एम्स में रात करीब 9.45 बजे अंतिम सांस ली। सुशील मोदी ने 2005 से 2013 तक और फिर 2017 से 2020 के बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को पटना में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।