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सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां सीमित, राफेल सौदे में घोटाले की जांच जेपीसी से करवानी चाहिएः कांग्रेस

By आदित्य द्विवेदी | Updated: December 14, 2018 12:41 IST

राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार आक्रामक, लोकसभा में राहुल गांधी से माफी मांगने की अपील। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर आप पाक-साफ हैं तो जेपीसी से जांच करवाने से डर क्यों रहे हैं।

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ठळक मुद्देकांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर आप पाक-साफ हैं तो जेपीसी से जांच करवाने से डर क्यों रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे की जांच से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। 

राफेल विमान सौदे की जांच से सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। संसद में सरकार ने राहुल गांधी से माफी की अपील की तो कांग्रेस पार्टी ने भी पलटवार करते हुए पीएम मोदी को चुनौती दे डाली। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राफेल सौदे में घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट नहीं, बल्कि संसदीय समिति को करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ताकतें सीमित हैं। इसलिए वो इस मामले की तह तक नहीं जा सकती। 

सुरजेवाला ने कहा, 'हम चुनौती देते हैं कि अगर आपको कोई डर नहीं तो आप जेपीसी जांच करवाने से डर क्यों रहे हैं। आपको जवाब देना पड़ेगा कि 500 करोड़ का जहाज 1670 करोड़ रुपये में कैसे खरीदा? रफाल की परतें खोलनी पड़ेगी। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की अवहेलना क्यों हुई? यहां दाल में काला नहीं बल्कि राफेल में पूरी दाल ही काली है। हम राफेल मामले में शाम चार बजे एक और खुलासा करने वाले हैं।'

राहुल गांधी से माफी की मांग

फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद में घोटाले के आरोपों का सामना कर रही केंद्र सरकार ने शुक्रवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्लीन चिट दिये जाने के बाद आक्रामक रुख अपनाते हुए लोकसभा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की। सदन में विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे और राफेल पर अदालत के फैसले के बाद भाजपा सदस्यों की नारेबाजी के कारण कार्यवाही शुरू होने के करीब 10 मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक के लिये स्थगित कर दी गई। और उसके बाद दोनों सदन दिनभर के लिए स्थगित कर दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट का जांच से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे की जांच से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने एकमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि इस सौदे में दखल देने का कोई कारण नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार की बुद्धिमत्ता पर जजमेंट लेकर नहीं बैठ सकते। इसके अलावा ऑफसेट पार्टनर चुनने के लिए पक्षपात करने के लिए सबूत का अभाव बताया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के.एम. जोसेफ की पीठ ने इस मामले में दायर याचिकाओं पर 14 नवंबर को सुनवाई पूरी की थी।

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