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कौन हैं सुनीता विलियम्स?, भारत में किस राज्य से विशेष संबंध, अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 19, 2025 15:48 IST

Sunita Williams updates: सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने दो अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ स्पेसएक्स यान पर सवार होकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अलविदा कहा।

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ठळक मुद्देभारतीय समयानुसार बुधवार तड़के पृथ्वी पर लौट आए। भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स की यह तीसरी अंतरिक्ष उड़ान थी।अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताए हैं।

Sunita Williams updates: नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स यूं तो पहले भी दो बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जा चुकी हैं लेकिन शायद ही उन्होंने यह कल्पना की होगी कि तीसरी बार अंतरिक्ष में जाने के बाद उन्हें वापसी के लिए लंबा इंतजार करना होगा और यह घटना इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी। नासा के अंतरिक्षयात्री बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स नौ महीने अंतरिक्ष में रहने के बाद भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के पृथ्वी पर लौट आए। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने दो अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ स्पेसएक्स यान पर सवार होकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को अलविदा कहा।

 

भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स की यह तीसरी अंतरिक्ष उड़ान थी और उन्होंने अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताए हैं। पूर्व अमेरिकी नौसैन्य कप्तान विलियम्स (59) का जन्म 19 सितंबर 1965 को यूक्लिड, ओहियो में हुआ था। उनके पिता दीपक पांड्या गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन से ताल्लुक रखते हैं तथा मां मां उर्सुलाइन बोनी पांड्या स्लोवेनिया से हैं।

अपनी बहु-सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करते हुए विलियम्स अपने साथ अंतरिक्ष में अपनी विरासत के प्रतीक ले जा चुकी हैं, जिनमें समोसे, स्लोवेनियाई ध्वज और भगवान गणेश की मूर्ति शामिल हैं। पिछले वर्ष जून में बुच विल्मोर के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए अपने तीसरे मिशन पर रवाना हुईं विलियम्स ने एक महिला द्वारा अंतरिक्ष में सर्वाधिक चहलकदमी किए जाने का रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया।

उनका यह तीसरा मिशन 286 दिन का रहा। विलियम्स के नाम संबंधित मिशन क्रम में अब 62 घंटे और नौ मिनट का अतिरिक्त सक्रिय समय दर्ज है, जिससे उन्होंने पूर्व अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन के 60 घंटे और 21 मिनट के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। सुनीता विलियम्स को बचपन से ही विज्ञान में रुचि थी, लेकिन उनका सपना पशु चिकित्सक बनना था।

उनके भाई जय का अमेरिकी नौसेना अकादमी में चयन हुआ था और वहां जाने के बाद सुनीता ने नौसेना अधिकारी बनने का सपना देखा। यह वह समय था जब महशूर अभिनेता टॉम क्रूज अभिनीत ‘टॉप गन’ धूम मचा रही थी। जब विलियम्स को नौसेना विमानन प्रशिक्षण कमान में शामिल होने का अवसर मिला तो वह लड़ाकू विमान उड़ाना चाहती थीं लेकिन उन्हें हेलीकॉप्टर का विकल्प चुनना पड़ा।

वह 1989 में नौसेना एविएटर बनीं और उन्होंने नॉरफ़ॉक, वर्जीनिया में ‘हेलिकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन 8’ में सेवा दी, इसके अलावा उनकी तैनाती ‘डेजर्ट शील्ड’ और ‘ऑपरेशन प्रोवाइड कम्फर्ट’ के समर्थन में भूमध्य सागर, लाल सागर और फारस की खाड़ी में भी की गई। विलियम्स ने सैनिकों और मानवीय सहायता के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा उनके नेतृत्व कौशल और विषम परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता ने उन्हें भविष्य के अंतरिक्ष यात्री के रूप में अग्रसर किया। विलियम्स को 1998 में नासा ने अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना और उन्होंने ‘जॉनसन स्पेस सेंटर’ में प्रशिक्षण लिया।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के साथ भी काम किया। वह नौ दिसंबर 2006 को ‘अंतरिक्ष शटल डिस्कवरी’ पर सवार होकर अपने पहले मिशन पर रवाना हुईं और आईएसएस अभियान 14 और 15 में शामिल होकर 195 दिनों के लिए कक्षा में रहीं। विलियम्स 17 जुलाई 2012 को रूसी अंतरिक्ष यान सोयूज पर सवार होकर अंतरिक्ष स्टेशन पर चार महीने के प्रवास के बाद वापस आईं और 19 नवंबर को पृथ्वी पर लौट आईं। वह 16 अप्रैल 2007 को अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली व्यक्ति बनीं।

उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन पर ट्रेडमिल पर बोस्टन मैराथन चार घंटे और 24 मिनट में पूरी की। वह 2012 में अपनी दूसरी अंतरिक्ष उड़ान के दौरान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का नेतृत्व करने वाली एकमात्र दूसरी महिला बनीं। उन्होंने स्टेशन के संचालन की देखरेख की, कक्षा में एक ट्रायथलॉन पूरा किया, और अंतरिक्ष में चहलकदमी के दौरान सूर्य को आभासी तौर पर ‘‘स्पर्श’’ करती हुई एक तस्वीर भी खींची।

विलियम्स ने अपने अंतरिक्ष मिशन के तुरंत बाद 2007 और 2013 सहित कम से कम तीन बार भारत का दौरा किया है और उन्हें 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विलियम्स को एक पत्र लिखकर उन्हें भारत की बेटी बताया था और देश आने का निमंत्रण दिया था। उनके पति माइकल जे. विलियम्स संघीय पुलिस अधिकारी हैं।

सुनीता विलियम्स के धरती पर लौटने की खुशी में गुजरात में उनके पैतृक गांव में जश्न

नासा की अंतरिक्षयात्री सुनीता विलियम्स के धरती पर लौटने पर बुधवार सुबह गुजरात के मेहसाणा जिले में उनके पैतृक गांव में जश्न का माहौल रहा। झूलासन के सभी लोग टेलीविजन पर इस घटना का सीधा प्रसारण देखने के लिए गांव के मंदिर में एकत्र हुए। सभी की निगाहें सुनीता की सुरक्षित वापसी पर टिकी थीं।

सुनीता विलियम्स और अन्य अंतरिक्षयात्रियों को लेकर कैप्सूल रूपी यान जैसे ही उतरा, ग्रामीणों ने आतिशबाजी शुरू कर दी और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाते हुए हर कोई झूमने लगा। गांववाले सुनीता की सुरक्षित वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उनकी सुरक्षित वापसी के लिए मंदिर में ग्रामीणों ने यज्ञ किया और प्रार्थना की।

ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने सुनीता की सुरक्षित वापसी के लिए मंदिर में अखंड ज्योति जलाई। लगभग नौ माह तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रहने के बाद जब सुनीता की वापसी जल्द होने की खबर आई तो तभी से झूलासन में उत्साह का माहौल बना हुआ था। उनके नजदीकी रिश्तेदार नवीन पांड्या ने कहा कि गांव के लोगों ने सुनीता की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की और अखंड ज्योति जलाई।

उन्होंने कहा कि गांववालों ने उनके सम्मान में एक भव्य जुलूस की योजना बनाई है। गांव में दीपावली और होली जैसा उत्साह बनाने के लिए प्रार्थना सभा होगी और आतिशबाजी की जाएगी। पांड्या ने कहा कि गांव के स्कूल से मंदिर तक जुलूस निकाला जाएगा जिसमें छात्र भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जुलूस के मंदिर पहुंचने के बाद अखंड ज्योति को विसर्जित कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गांववाले सुनीता को झूलासन में आमंत्रित करने के लिए उत्सुक हैं। सुनीता विलियम्स कम से कम तीन बार भारत की यात्रा पर आ चुकी हैं। वह 2007 और 2013 में अंतरिक्ष मिशन के बाद भारत आई थीं। उन्हें 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनके पिता दीपक पांड्या मूल रूप से झूलासन से थे और 1957 में अमेरिका चले गए थे।

झूलासन प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य विशाल पांचाल ने कहा कि बुधवार के जश्न के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर नौ महीने पहले बोइंग की एक परीक्षण उड़ान के जरिये अंतरिक्ष स्टेशन में पहुंचे थे। दोनों अंतरिक्षयात्री पांच जून 2024 को बोइंग के नए स्टारलाइनर क्रू यान में सवार होकर अंतरिक्ष में गए थे और उनके एक सप्ताह बाद ही लौटने की उम्मीद थी। अंतरिक्ष स्टेशन के रास्ते में इतनी सारी समस्याएं आईं कि नासा को अंततः स्टारलाइनर को खाली वापस धरती पर लाना पड़ा और अंतरिक्षयात्रियों की घर वापसी में देरी हुई।

अंतरिक्षयात्रियों को लेकर ‘स्पेसएक्स’ यान को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से प्रस्थान करने के कुछ ही घंटों बाद फ्लोरिडा पैनहैंडल के तेलाहासे जलक्षेत्र में उतारा गया। सुनीता विलियम्स ने नौ बार अंतरिक्ष में चहलकदमी करके रिकॉर्ड बनाया। इस क्रम में उन्हें 62 घंटे लगे। विलियम्स ने अंतरिक्ष में सबसे ज़्यादा चहलकदमी करने का महिला अंतरिक्ष यात्री होने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

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