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सिंघू बॉर्डर: प्रदर्शनकारी किसानों के बीच एकता की भावना मजबूत करने के लिए सदभावना रैली निकाली गई

By भाषा | Updated: January 28, 2021 22:56 IST

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नयी दिल्ली, 28 जनवरी किसान संगठनों के नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के बीच एकता की भावना मजबूत करने के लिए बृहस्पतिवार को सिंघू बॉर्डर से ‘‘सदभावना रैली ’’ निकाली।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड ने दिल्ली में हिंसक रूप धारण कर लिया था और इस दौरान हुई हिंसा में 394 सुरक्षाकर्मी घायल हो गये, जबकि एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई।

सदभावना रैली का नेतृत्व कई किसान नेताओं ने किया, जिनमें बलबीर सिंह राजेवाला, दलजीत सिंह दल्लेवाल, दर्शन पाल और गुरनाम सिंह चढूनी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आधार पर और राज्यों के आधार पर प्रदर्शनकारी किसानों को बांटने की कोशिश कर रही ताकतों का मुकाबला करने के लिए यह मार्च निकाला गया है। साथ ही, मार्च का उद्देश्य यह प्रदर्शित करना भी है कि वे तिरंगे (राष्ट्र ध्वज) का सम्मान करते हैं।

तिरंगा झंडा लगे कई ट्रैक्टरों और दो पहिया वाहनों ने 16 किमी लंबी रैली में हिस्सा लिया। यह सिंघू प्रदर्शन स्थल के मंच से शुरू हुई और वहां तक गई, जहां कुंडली-मानेसर पलवल हाईवे प्रारंभ होता है।

क्रांतिकारी किसान यूनियन (पंजाब) के अवतार सिंह मेहमा ने कहा, ‘‘यह रैली सरकार के इन आरोपों का जवाब है कि किसानों ने गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय झंडे का अपमान किया। पंजाब और हरियाणा के किसानों ने रैली में भाग लिया, जिसमें दोनों राज्यों के बीच अत्यधिक एकजुटता प्रदर्शित की गयी। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम यह प्रदर्शित करने के लिये रैली निकालना चाहते थे कि किसान राष्ट्रीय झंडे का किसी और की तुलना में कहीं अधिक सम्मान करते हैं। और यह देश किसानों का है, यह देश अपने किसानों और मजदूरों के बूते ही चल रहा है।’’

उन्होंने कहा कि रैली में शामिल हुए वाहनों पर किसान संघों के झंडे नहीं थे, बल्कि सिर्फ और सिर्फ तिरंगा झंडा लगा था।

रैली के दौरान प्रदर्शनकारी किसानों ने ‘किसान एकता जिंदाबाद’ और पंजाब-हरियाणा भाईचारे का नारा लगाया।

भारतीय किसान यूनियन एकता (दाकौंदा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा कि रैली का आयोजन उन ताकतों का मुकाबला करने के लिए किया गया है जो प्रदर्शनकारी किसानों को धर्म के आधार पर और राज्यों के आधार पर विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐतिहासिक रूप से पंजाबी और हरियाणवी ने तिरंगे के सम्मान की हिफाजत की है और अब यह (केंद्र) सरकार राष्ट्रीय झंडे का अपमान करने के आरोप में हमारे खिलाफ मामले दर्ज कर रही है। हम सरकार को किसानों के संघर्ष को बदनाम करने की कभी इजाजत नहीं देंगे और हम सभी एकजुटता के साथ लड़ेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘देशभक्ति की भावना सिर्फ एक खास समूह के लोगों में ही नहीं है...किसानों के परिवारों ने भारतीय थल सेना को उसके सैनिक दिये हैं। किसान अगर ज्यादा नहीं तो समान रूप से देशभक्त हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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