अफ़जल गुरू की बरसी पर कश्मीर में जनजीवन अस्तव्यस्त, 11 फरवरी को भी किया गया है हड़ताल का आह्वान
By सुरेश एस डुग्गर | Updated: February 9, 2021 16:17 IST2021-02-09T16:16:58+5:302021-02-09T16:17:53+5:30
11 फरवरी को जेकेएलएफ के संस्थापक मकबूल भट्ट की बरसी है। भट्ट को 37 साल पहले तिहाड़ जेल में फांसी के बाद दफना दिया गया था।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
जम्मू, 9 फरवरी।भारतीय संसद पर हुए हमले के दोषी मुहम्मद अफजल गुरु को फांसी देने के आठ साल पूरे होने पर कश्मीर में बुलाए गए बंद का मंगलवार सुबह आम जनजीवन पर असर देखने को मिला। अफजल गुरु को नौ फरवरी 2013 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई थी। जबकि 11 फरवरी को जेकेएलएफ के नेता मकबूल बट की 37वीं बरसी पर भी कश्मीर बंद का आह्वान किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में मंगलवार सुबह दुकानें, पेट्रोल पंप एवं अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान बंद दिखाई दिए। जबकि सड़कों पर सार्वजनिक यातायात भी कम ही नजर आया। निजी कार, आटो रिक्शा एवं कैब शहर की सड़कों पर चलते रहे। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की हड़ताल की खबर घाटी के अन्य जिलों के मुख्यालय से भी मिली है।
गौरतलब है कि आज संसद हमले के मुख्य साजिशकर्त्ता अफजल गुरु की 8वीं बरसी है। जेकेएलएफ ने अफजल गुरु और मकबूल बट की बरसी के सिलसिले में नौ व 11 फरवरी को कश्मीर बंद का आहवान कर रखा था। अफजल गुरु को 8 साल पहले 9 फरवरी को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दी गयी थी। अलगाववादियों ने 11 फरवरी तक तीन दिन के बंद का आह्वान किया है।
अधिकारियों ने बताया कि किसी अनहोनी से बचाने के लिए शहर एवं घाटी के अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई थी। अतना जरूर था कि प्रशासन ने गत वर्षों की तरह इस बार लोगों के जमा होने या इंटरनेट सेवा स्थगित करने जैसे एहतियाती कदम नहीं उठाए थे।