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संजय गांधी ने इंदिरा गांधी को एक डिनर पार्टी में 6 थप्पड़ मारे थे, इस खबर में कितनी सच्चाई है?

By विकास कुमार | Updated: January 8, 2019 16:07 IST

सनसनीखेज पत्रकारिता का फितूर दुनिया भर के पत्रकारों के ऊपर छाया रहता है और लुईस की ये रिपोर्ट उसी प्रयास का हिस्सा भर होगा जिसमें तथ्य कम और सनसनी ज्यादा है, जिसके कारण उनकी रिपोर्ट पर भरोसा करना मुश्किल है.

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इमरजेंसी के पहले का वक़्त था और देश में चारो तरफ विरोध-प्रदर्शन का दौर जारी था. भारत में लोकतान्त्रिक अधिकारों की हत्या से पहले देश की जनता सड़कों पर थी और तत्कालीन  सरकार से महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर जवाब मांग रही थी. कुछ लोगों को लगने लगा था कि देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था में कुछ अप्रिय घटना घटने वाली है और जनता के लोकतान्त्रिक अधिकारों को कुचलने की तैयारी हो रही है. तभी एक ऐसी खबर दस्तक देती है जिसपर भरोसा करना उतना ही कठिन होता है जितना की देश में आपातकाल के लगने का.

खबर थी की एक बेटे ने अपनी मां को एक फैमिली फंक्शन में लोगों के सामने सरेआम चाटा मारा और कई बार मारा. कलयुग के दौर में इन ख़बरों पर विश्वास करना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन जब लोगों को पता चला कि वो बेटा संजय गांधी थे और वो मां इंदिरा गांधी थीं एक पल को सब हक्क़ा-बक्क़ा रह गए और किसी को भी इन सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था. 

एक आज्ञाकारी बेटे ने अपनी माँ और देश की प्रधानमंत्री को थप्पड़ मारा हो, इस पर भला कैसे कोई यकीन कर सकता था. मामला हाई प्रोफाइल था इसलिए मीडिया ने इस मुद्दे को ज्यादा तूल नहीं दिया लेकिन इस घटना को सामने लाने वाला शख्स भी पत्रकार था और विदेशी पत्रकार था.

वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार ने फैलाई ये बात 

जब आपातकाल की घोषणा हुई तो पुलित्जर पुरस्कार विजेता पत्रकार लुईस एम सिमंस द वाशिंगटन पोस्ट के संवाददाता के रूप में दिल्ली में तैनात थे. उन्हीं दिनों अमेरिका के इस प्रतिष्ठित अखबार में सिमंस की यह खबर छपी कि एक डिनर पार्टी के दौरान संजय गांधी ने अपनी मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कई थप्पड़ मारे.

दरअसल लुईस कहते हैं कि ये घटना आपातकाल लगने के पहले एक डिनर पार्टी में घटी थी जिसमें वो भी मौजूद थे. लुईस अपने दो सूत्रों का जिक्र करते हैं जो इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी थे लेकिन उन्होंने कभी भी उन सूत्रों के नाम नहीं बताएं और इसे हमेशा गुप्त रखा.

जब इंदिरा को सताई संजय की चिंता 

इंदिरा गांधी और संजय गांधी के रिश्ते मां और बेटे के अटूट प्रेम की एक अमर निशानी है. कैसे एक माँ अपनी ज़िद्दी बेटे के कारण इस देश में आपातकाल लगाती है और आपातकाल के बाद जब कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हार जाती है तो उसे दिन-रात अपने बेटे की चिंता सताती है.

इंदिरा गांधी इसी गम में डूबी रहती थीं कि देश के तात्कालीन गृहमंत्री चौधरी चरण सिंह उनके बेटे को जेल में डाल देंगे. इंदिरा गांधी की दोस्त पुपुल जयकर ने अपनी किताब में इस प्रसंग का मार्मिक चित्रण किया है. हम आपातकाल की आलोचना कर सकते हैं लेकिन इंदिरा गांधी और संजय गांधी को लेकर फैलाये गए इन झूठे किवदंतियों पर भरोसा नहीं कर सकते.

तथ्य से ज्यादा सनसनी 

पत्रकारों का काम होता है ऐसी ख़बरें लाना जो सनसनी फैला दे और उसे रातों-रात प्रसिद्धि दिला दे. सनसनीखेज पत्रकारिता का फितूर दुनिया भर के पत्रकारों के ऊपर छाया रहता है और लुईस की ये रिपोर्ट उसी प्रयास का हिस्सा भर होगा जिसमें तथ्य कम और सनसनी ज्यादा है, जिसके कारण उनकी रिपोर्ट पर भरोसा करना मुश्किल है.

 खैर लुईस की रिपोर्ट में कितनी सच्चाई थी इस बात का पता तो केवल उनके तथाकथित सूत्रों को ही थी लेकिन इस बात की जानकारी सबको है कि जब प्लेन क्रैश में संजय गांधी की मौत हुई तो कैसे 'आयरन लेडी' माने जानी वाली इंदिरा गांधी फूट-फूट के रो पड़ी और बेटे के शव को घंटों निहारती रहीं.

टॅग्स :इंदिरा गाँधीसंजय गांधीकांग्रेस
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