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शिवाजी महाराज पर आधारित फिल्मों में तथ्यों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे, संभाजी छत्रपति ने फिल्म निर्माताओं को दी चेतावनी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 7, 2022 08:40 IST

शिवाजी महाराज के वंशज संभाजी छत्रपति ने पत्रकारों से बातचीत में दो मराठी फिल्मों ‘हर हर महादेव’ (हाल में रिलीज हुई) और ‘वेडात मराठे वीर दोडले सात’ (आगामी फिल्म) को लेकर नाराजगी व्यक्त की।

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ठळक मुद्देसंभाजी छत्रपति ने कहा, कई फिल्में भावनाओं को आहत करने के साथ विवाद पैदा कर रही हैं।‘हर हर महादेव’ और ‘वेडात मराठे वीर दोडले सात’ में विसंगतियों को प्रदर्शित किया गया हैः संभाजी

पुणेः पूर्व राज्यसभा सदस्य और कोल्हापुर शाही परिवार के वंशज संभाजी छत्रपति ने चेतावानी दी है कि अगर महान योद्धा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज पर आधारित किसी भी आगामी फिल्म में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया तो वह ऐसी फिल्मों का विरोध करेंगे और उनकी रिलीज रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। शिवाजी महाराज के वंशज संभाजी छत्रपति ने पत्रकारों से बातचीत में दो मराठी फिल्मों ‘हर हर महादेव’ (हाल में रिलीज हुई) और ‘वेडात मराठे वीर दोडले सात’ (आगामी फिल्म) को लेकर नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने कहा, ‘‘कई फिल्में भावनाओं को आहत करने के साथ विवाद पैदा कर रही हैं। सिनेमाई स्वतंत्रता के नाम पर हाल में रिलीज हुई ‘हर हर महादेव’ और ‘वेडात मराठे वीर दोडले सात’ में विसंगतियों को प्रदर्शित किया गया है। मैं शिवाजी महाराज पर आधारित फिल्मों में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करूंगा।’’ उन्होंने चेतावनी दी, ‘‘अगर भविष्य में गलत तथ्यों वाली ऐसी फिल्में बनती हैं तो मैं अपने अंदाज में उनका विरोध करूंगा और उनकी रिलीज पर भी रोक लगवाऊंगा।’’

इन फिल्मों को बढ़ावा देने वाले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे के बारे में पूछे जाने पर पूर्व राज्यसभा सदस्य ने कहा कि वह केवल अपनी बात कहेंगे और मीडिया से इन सवालों को उन दोनों नेताओं से पूछने को कहा। संभाजी छत्रपति ने कहा, ‘‘मेरा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। अगर ऐसी फिल्में गलत तथ्यों के साथ बनाई गई तो मैं उनका विरोध करूंगा। अगर जरूरत पड़ी तो मैं सेंसर बोर्ड को एक पत्र लिखूंगा। मैं यह भी सुझाव दूंगा कि ऐसी फिल्मों की रिलीज से पहले ऐतिहासिक तथ्यों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया जाए।’’ पूर्व सांसद ने कहा कि इतिहास के नाट्यकरण की एक सीमा होती है। ऐतिहासिक फिल्में बनाते समय फिल्म निर्माताओं को सतर्क रहने की जरूरत है।

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