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निर्मला जैन को मिला 2020 के लिए‘जे.सी. जोशी स्मृति शब्द साधक सम्मान’ और 2021 के लिए डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी को दिया गया यह अवॉर्ड

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 15, 2022 18:43 IST

हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक’ सम्मानों की घोषणा कर दी गई है। वर्ष 2020 का ‘शब्द साधक जीवन मानक सम्मान’ संजना तिवारी को दिया जा रहा है।

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ठळक मुद्देवर्ष 2020 का ‘शब्द साधक जीवन मानक सम्मान’ संजना तिवारी को मिला2021 का  ‘जे. सी. जोशी शब्द साधक जीवन मानक सम्मान’ नवनीत त्यागी को दिया गया

नई दिल्ली: हिंदी साहित्यिक पत्रिका पाखी द्वारा प्रति वर्ष दिए जाने वाले हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक’ सम्मानों की घोषणा कर दी गई है। वर्ष 2020 का ‘शब्द साधक जीवन मानक सम्मान’ संजना तिवारी को दिया जा रहा है। संजना तिवारी लगभग 25 वर्षों से हिंदी की किताबें बेचकर अपना परिवार चला रही हैं। पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली के मंडी हाउस में स्थित श्रीराम सेंटर के सामने एक वृक्ष के नीचे हिंदी पुस्तकों की अपनी दुकान लगाती हैं। हिंदी पुस्तकों के प्रति उनका लगाव और सेवा भाव कबीले तारीफ है। 

 वर्ष 2020 का ‘जे. सी. जोशी शब्द साधक कविता सम्मान’ रश्मि भारद्वाज को उनका कविता संग्रह ‘मैंने अपनी मां को जन्म दिया है’ के लिए दिया जा रहा है। नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री और अनुवादक हैं।  

वर्ष 2020 का ‘जे. सी. जोशी शब्द साधक हिंदीतर सम्मान’ ममांग दई को दिया जा रहा है। ममांग दई एक भारतीय आदिवासी कवयित्री, उपन्यासकार और पत्रकार हैं।

वर्ष 2020 का ‘जे. सी. जोशी शब्द साधक अनुवाद सम्मान’ विभा रानी को दिया जा रहा है। उन्होंने प्रख्यात मैथिली रचनाकार लिली रे के उपन्यासों, कहानियों तथा नाटकों का अनुवाद किया है।

साल 2020 का ‘जे. सी. जोशी शब्द साधक जनप्रिय लेखक सम्मान’ उमा शंकर चौधरी को उनका कहानी संग्रह ‘दिल्ली में नींद’ के लिए दिया जा रहा है। उमा शंकर चौधरी हिंदी के चर्चित कथाकार हैं।  

वर्ष 2020 का ‘जे. सी. जोशी शब्द साधक आलोचना सम्मान’ वीरेंद्र यादव को उनके समग्र आलोचनात्मक अवदान के लिए दिया जा रहा है। 

वर्ष 2020 का ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक शिखर सम्मान’ प्रोफेसर निर्मला जैन को दिया जा रहा है। निर्मला जैन ने अपनी वस्तुनिष्ठ आलोचना-दृष्टि और बेबाक अभिव्यक्ति से हिंदी के पुरुष-प्रधान आलोचना-परिप्रेक्ष्य में उल्लेखनीय जगह बनाई है। 

हिंदी संसार को पाश्चात्य साहित्य सिद्धांत से परिचय कराने का श्रेय निर्मला जैन को जाता है। उन्होंने यूरोपीय विचारकों कई पुस्तकों का अनुवाद हिंदी में  किया है। उनकी चर्चित पुस्तकों की एक लंबी फेहरिस्त है। 

‘आट्टानिक हिंदी काव्य में रूप विधाएं’, ‘रस सिद्धांत और सौंदर्यशास्त्र’, 'साहित्य साहित्यः मूल्य और मूल्यांकन’, ‘आधुनिक साहित्यः रूप और संरचना’, ‘समाजवादी साहित्य : विकास की समस्याएं’, ‘हिंदी आलोचना की बीसवीं सदी, ‘कथा समय में तीन हमसफर’, ‘पाश्चात्य साहित्य चिंतन और ‘जमाने में हम’, ‘दिल्ली शहर दर शहर’ उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं।

वर्ष 2021 का  ‘जे. सी. जोशी शब्द साधक जीवन मानक सम्मान’ नवनीत त्यागी को दिया जा रहा है। नवनीत त्यागी लगभग 35 वर्षों से विभिन्न प्रकाशनों के लिए प्रूफ रीडिंग का कार्य कर रहे हैं। जीवन भर उनका पेशा प्रूफ रीडिंग ही रहा है। उनके जीवन संघर्ष और हिंदी के प्रति उनकी अनुपम सेवा भाव को ध्यान  में रखते हुए नवनीत त्यागी को यह सम्मान दिया जा रहा है।

वर्ष 2021 का ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक कविता सम्मान’ जसिंता करकेट्टा को दिया जा रहा है। जसिंता करकेट्टा आदिवासी संवेदना और सरोकारों की नई पीढ़ी की कवयित्री हैं। वर्ष 2021 का ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक हिंदीतर सम्मान’  कावेरी राय चौधरी को दिया जा रहा है। कावेरी राय चौधरी बंगला की चर्चित कथाकार हैं।  वर्ष 2021 का ‘जे. सी. जोशी शब्द साधक अनुवाद सम्मान’ कंचन वर्मा को दिया जा रहा है। युवा अनुवादक कंचन वर्मा ने दर्जन भर पुस्तकों का अनुवाद अंग्रेजी से हिंदी में किया है।

वर्ष 2021 का ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक जनप्रिय लेखक सम्मान’ योगेन्द्र आहूजा को उनका कहानी संग्रह ‘लफ्फाज तथा अन्य कहानियां’ के लिये दिया जा रहा है।  

वर्ष 2021 का ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक आलोचना सम्मान’ प्रोफेसर दुर्गा प्रसाद गुप्त को उनके समग्र आलोचनात्मक अवदान के लिए दिया जा रहा है। प्रोफेसर गुप्त की अपनी गहरी अंतर्दृष्टि और आलोचनात्मक विवेक से सभी का ध्यान आकर्षित किया है।

वर्ष 2021 का ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक शिखर सम्मान’ डाक्टर विश्वनाथ त्रिपाठी को दिया जा रहा है। 

विश्वनाथ त्रिपाठी हिंदी के वरिष्ठ आलोचक और गद्यकार हैं। प्रगतिशील विचारट्टारा से संबद्ध डॉ. त्रिपाठी ने मध्यकालीन साहित्य से लेकर समकालीन साहित्य तक की आलोचना में गहरी अंतर्दृष्टि का परिचय दिया है। जीवनी एवं संस्मरण लेखन के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। 

‘हिंदी आलोचना’, ‘लोकवादी तुलसीदास’, ‘मीराँ का काव्य’, ‘देश के इस दौर में’, ‘कुछ कहानियाँ : कुछ विचार’, ‘पेड़ का हाथ’, ‘उपन्यास का अंत नहीं हुआ है’, ‘कहानी के साथ साथ’, ‘आलोचक का सामाजिक दायित्व’ आदि उनकी प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ हैं। उन्होंने ‘व्योमकेश दरवेश’ शीर्षक से आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की जीवनी लिखी हैं।

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