पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 20 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद अब राज्यसभा जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में गुरुवार को एनडीए के सभी उम्मीदवारों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, जदयू नेता एवं केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, भाजपा नेता शिवेश कुमार राम और रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने नामांकन दाखिल किया। नामांकन दाखिल करने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नितिन नबीन एक साथ बिहार विधानसभा पहुंचे। नामांकन के दौरान अमित शाह ने दोनों नेताओं को शुभकामनाएं भी दी।
खास बात यह रही कि तीनों नेताओं के एक ही गाड़ी में सवार होकर विधानसभा पहुंचने से सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। इससे पहले दिल्ली से पटना पहुंचने पर अमित शाह ने नीतीश कुमार और नितिन नबीन के साथ अहम बैठक भी की। नामांकन के दौरान एनडीए के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी विधानसभा परिसर में मौजूद रहे।
बिहार की राजनीति के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा के लिए नामांकन करना काफी अहम राजनीतिक घटना मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह बड़ा फैसला अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों के चलते लिया है।
2005 से (बीच के कुछ महीनों को छोड़कर) लगातार बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार अब केंद्र की राजनीति में एक नई भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि यह भाजपा और जदयू के बीच किसी बड़े ‘पावर शेयरिंग’ समझौते का हिस्सा हो सकता है। इधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस फैसले ने उनके समर्थकों और जदयू के कार्यकर्ताओं को गहरे सदमे में डाल दिया है।
पटना स्थित पार्टी दफ्तर के बाहर सुबह से ही पुराने कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा। मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी जदयू कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कई कार्यकर्ता रोते हुए देखे गए। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि नीतीश कुमार के बिना जदयू को एकजुट रखना असंभव होगा। पार्टी के भीतर फिलहाल कोई ऐसा दूसरा चेहरा नहीं दिखता, जिसकी स्वीकार्यता पूरे बिहार में हो।
कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि नीतीश बाबू को अभी बिहार की जरूरत है, उन्हें दिल्ली नहीं जाना चाहिए। जदयू के कार्यकर्ताओं में इस बात की चिंता है कि नीतीश कुमार के बाद अब पार्टी का क्या होगा? जिसे लेकर कार्यकर्ता विरोध और प्रदर्शन का भी मन बना रहे हैं। उधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
क्या भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाएगी या जदयू से ही किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा? फिलहाल बिहार की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां से ‘नया बिहार’ उदय होने वाला है। लेकिन कार्यकर्ताओं की आंखों में अपने नेता के विदा होने की मायूसी साफ देखी जा सकती है।
विधानसभा में नामांकन की इस प्रक्रिया को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के एक बड़े अध्याय के समापन और नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ‘नीतीश युग’ के अंत की दस्तक है। इस बीच भाजपा भी इस पूरे घटनाक्रम में बेहद सतर्कता बरत रही है।
पार्टी एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रही है, ताकि किसी तरह का राजनीतिक संदेश गलत न जाए। एनडीए के लिए यह क्षण रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि नेतृत्व परिवर्तन का असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के बाद बिहार की कमान किसे सौंपी जाएगी और सत्ता संतुलन किस दिशा में झुकेगा?
पटना की राजनीतिक फिजा में जो सरगोशियां हैं, वे आने वाले दिनों में बड़े सियासी बदलाव का संकेत दे रही हैं। उल्लेखनीय है कि नामांकन दाखिल करने जाने से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। अपने संदेश में उन्होंने जनता के विश्वास और समर्थन के लिए आभार जताते हुए कहा कि वे इस बार राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनना चाहते हैं।
नीतीश कुमार ने लिखा कि पिछले दो दशक से अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर लगातार भरोसा जताया है। इसी विश्वास की ताकत से उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ बिहार और यहां के लोगों की सेवा करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जनता के सहयोग और समर्थन की वजह से ही बिहार विकास और सम्मान की नई दिशा में आगे बढ़ा है।
उन्होंने अपने संसदीय जीवन की शुरुआत को याद करते हुए कहा कि राजनीति में आने के समय से ही उनके मन में एक इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। इसी क्रम में अब वे राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं और इसी उद्देश्य से इस बार चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में यह भी भरोसा दिलाया कि राज्यसभा जाने के बाद भी जनता के साथ उनका संबंध पहले की तरह बना रहेगा। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास और प्रगति के लिए उनका संकल्प पहले की तरह जारी रहेगा और राज्य की जनता के साथ मिलकर विकसित बिहार के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
नीतीश कुमार ने आगे कहा कि बिहार में जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। बता दें कि राज्यसभा चुनाव के लिए आज 5 मार्च नामांकन की आखिरी तारीख थी। 16 मार्च को मतदान होगा क्योंकि राजद की ओर से अमरेन्द्रधारी सिंह को मैदान में उतारा गया है।
एडी सिंह वर्तमान में राजद की ओर से राज्यसभा सदस्य हैं। उनका भी कार्यकाल समाप्त होने वाला है। बिहार से राज्यसभा के 5 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। जिसमें एनडीए की ओर से ही 5 उम्मीदवार उतारे गए हैं। जबकि महागठबंधन की ओर से एक उम्मीदवार के मैदान में आने से उम्मीदवारों की संख्या 6 हो गई है। ऐसे में मतदान होना तय हो गया है।