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राजस्थान चुनावः सूबे की पहली महिला विधायक बनी थीं यशोदा देवी, जानिए कैसे लड़ा था चुनाव

By रामदीप मिश्रा | Updated: September 13, 2018 08:54 IST

देश की आजादी के बाद राजस्थान में पहली बार विधानसभा का चुनाव साल 1952 में हुआ, हालांकि इसमें राज्य की किसी महिला उम्मीदवार ने जीत नहीं दर्ज कर सकी थी।

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जयपुर, 13 सितंबरः राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए रणभेरी बज चुकी है और सभी पार्टियां चुनाव प्रचार-प्रसार की तैयारी करने में जुटी हैं। लेकिन, इसके इतर आज आपको उस महिला विधायक के बारे में बताएंगे जो पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचीं और इतिहास के पन्नों पर उनका नाम दर्ज हो गया। दरअसल, हम बात यशोदा देवी की कर रहे हैं। 

यशोदा ने उपचुनाव जीतकर रचा था इतिहास

देश की आजादी के बाद राजस्थान में पहली बार विधानसभा का चुनाव साल 1952 में हुआ, हालांकि इसमें राज्य की किसी महिला उम्मीदवार ने जीत नहीं दर्ज कर सकी थी। लेकिन, उसके बाद 1953 में हुए उपचुनाव में बांसवाड़ा विधानसभा सीट से यशोदा देवी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने वाली राज्य की पहली महिला विधायक बनने का गौरव हासिल किया। 3 जनवरी 2004 में इनका निधन हो गया। इनका जन्म 1927 में हुआ था।

इतने वोटों से हुई थी जीत

पहले विधानसभा कार्यकाल की शुरुआत साल 1952 में हुई और 1957 तक रहा था। बांसवाड़ा विधानसभा सीट से यशोदा देवी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (पीएसपी) के टिकट पर खड़ी हुई थीं। उन्होंने कांग्रेस के नटवरलाल को हराया था। उनके खाते में 14 हजार 862 वोट पड़े थे, जबकि कांग्रेस को आठ हजार 451 वोट मिले थे। यशोदा ने छह हजार 411 वोटों से जीत दर्ज की थी। इसके बाद वे राज्य की प्रथम विधानसभा की प्रथम महिला विधायक बन गई थीं। 

पहले विधानसभा चुनाव में 4 महिलाएं मैदान में थीं 

मिली जानकारी के अनुसार, पहले विधानसभा चुनाव में केवल चार महिलाओं ने पर्चा फाइल किया था और मैदान में उतरी थीं। जिनमें फागी विधानसभा सीट से केएलपी पार्टी की चिरंजी देवी, जयपुर शहर विधानसभा क्षेत्र ए से समाजवादी पार्टी की वीरेन्द्रा बाई, उदयपुर शहर निर्वाचन क्षेत्र से शांता देवी (निर्दलीय) और सोजत मेन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जनसंघ की रानीदेवी का नाम शामिल है। हालांकि चुनाव में चारों महिलाएं हार गई थीं। 

इस वजह से करवाए गए थे उपचुनाव

आपको बता दें, पहले विधानसभा चुनाव में बांसवाड़ा की सीट पर एसपी पार्टी से भेलजी निर्दलीय प्रत्याशी भारतेंद्र सिंह के बीच लड़ा गया था, जिसमें भेलजी को आठ हजार 70 वोट मिले थे, जबकि भारतेंद्र सिंह को 4658 वोट मिले थे। इस सीट पर भेलजी की जीत तय हो गई थी, लेकिन चुनाव अवैध घोषित करार दिया गया था। इसके बाद बांसवाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए थे। 

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