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राजस्थान चुनावः सूबे के इस विधानसभा भवन में नहीं बैठे एकसाथ 200 विधायक, 'भूत-प्रेतों का है साया' 

By रामदीप मिश्रा | Updated: November 29, 2018 16:49 IST

इस साल 23 फरवरी को बीजेपी विधायक हबीबुर्रहमान अशरफी और मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने कहा था कि राजस्थान विधानसभा भवन में भूत-प्रेत का साया है, जिसकी वजह से कभी भी एकसाथ 200 विधायक नहीं बैठे हैं।

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राजस्थान में अलवर जिले के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के उम्मीदवार लक्ष्मण सिंह का का गुरुवार (29 नवंबर) को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। इसके बाद एक बार फिर सूबे के विधानसभा भवन की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं। कहा जाता रहा है कि जब से इस विधानसभा भवन का निर्माण हुआ है तब से यहां भूत-प्रेत का साया मंडराता है, जिसकी वजह से कभी भी एकसाथ 200 विधायक जीतकर सदन में नहीं बैठे हैं।

अपशगुन की चर्चाओं ने पकड़ा जोर

दरअसल, इस साल 23 फरवरी को बीजेपी विधायक हबीबुर्रहमान अशरफी और मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने कहा था कि राजस्थान विधानसभा भवन में भूत-प्रेत का साया है, जिसकी वजह से कभी भी एकसाथ 200 विधायक नहीं बैठे हैं। इसको लेकर उन्होंने वसुंधरा राजे सरकार से मांग की थी कि यहां हवन-पूजन करवाया जाए ताकि यह अपशगुन खत्म किया जा सके। उनकी इस बात को लेकर जमकर हंमागा हुआ था। हालांकि बीएसपी उम्मीदवार की मौत के बाद एक बार फिर अपशगुन की चर्चा जोर पकड़ने लगी है।

भवन की भूमि पर था श्मशान

कालूलाल गुर्जर का कहना था कि जहां पर राजस्थान विधानसभा का भवन बना हुआ है वहां पर श्मशान घाट हुआ करता था और इसी जगह मृत बच्चे दफनाए जाते थे। इसलिए ऐसा माना जाता रहा है कि यहां पर कोई आत्मा हो सकती है, जिसे अभी तक शांति न मिली हो। इसी वजह से 200 विधायक साथ नहीं बैठ सके हैं। इस संबंध में बीजेपी विधायक हबीबुर्रहमान अशरफी का भी ऐसा ही कुछ कहना था। उन्होंने कहा था कि भारतीय संस्कृति माना जाता है कि श्मशान वाली भूमि पर भवन का निर्माण नहीं करना चाहिए। इस मामले को लेकर उन्होंने सीएम वसुंधरा राजे से भी बात की थी।

ऐसे नहीं बैठे एक साथ 200 विधायक

इस विधानसभा को साल 2001 में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद से लगातार एकसाथ 200 विधायक नहीं बैठे हैं। फरवरी 2002 में विधायक किशन मोटवानी की मौत, दिसंबर 2002 में विधायक जगत सिंह दायमा की मौत, विधायक भीखाभाई की मौत, जनवरी 2005 में विधायक रामसिंह बिश्नोई की मौत, मई 2006 में विधायक अरुण सिंह की मौत, दिसंबर 2006 में विधायक नाथूराम आहारी की मौत, 2011 में कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा को जेल, विधायक मलखान सिंह को जेल, राजेन्द्र राठौड़ को जेल, 2013 में बाबूलाल नागर को जेल, 2017 में बीएल कुशवाह को जेल, 2017 में विधायक कीर्ति कुमारी की मौत और 2018 में कल्याण सिंह की मौत हो गई थी।

199 सीटों पर होगा चुनाव

वहीं, इस बार उम्मीद लगाई जा रही थी कि 200 विधायक एकसाथ विधानसभा में चुनकर पहुंचेंगे। लेकिन चुनाव से पहले ही लक्ष्मण सिंह का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 62 वर्ष के थे। इससे अब राज्य की 200 में से 199 सीटों पर ही सात दिसंबर को मतदान होगा। उम्मीदवार के निधन होने पर चुनाव स्थगित कर दिया जाता है। रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में सिंह समेत कुल 21 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

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