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राहुल गांधी के करीबी लोगों ने दिखाया था PM बनने का सपना, कैबिनेट में इन लोगों को शामिल करना चाहते थे कांग्रेस अध्यक्ष

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: June 16, 2019 11:45 IST

राहुल गांधी के भरोसेमंद प्रवीण चक्रवर्ती ने 21 मई को उनसे मुलाकात की थी और राहुल को 184 संभावित विजेताओं की सूची सौंपी थी।

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ठळक मुद्देराहुल गांधी ने सहयोगी दलों से मुलाकात करके आगामी कैबिनेट में शामिल होने का प्रस्ताव तक रख दिया था।वीण ने कांग्रेस को चुनावी डेटा की वो हार्ड डिस्क भी नहीं सौंपी है जिसके बदले उन्होंने कथित रूप से पार्टी से 24 करोड़ रुपये लिए थे।

लोकसभा चुनाव 2019 में करारी हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस्तीफे की पेशकश की है। इसकी प्रमुख वजह राहुल गांधी को अपनी ही टीम से मिला बड़ा झटका माना जा रहा है। संडे गार्जियन लाइव की एक रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी की अपनी टीम ने उन्हें यह कहकर गुमराह किया था कि वो लोकसभा चुनाव में 164-184 सीटें जीत रहे हैं। इस गलत जानकारी के दम पर राहुल गांधी ने सहयोगी दलों से मुलाकात करके आगामी कैबिनेट में शामिल होने का प्रस्ताव तक रख दिया था।

इसी गलत जानकारी के आधार पर राजधानी दिल्ली स्थित कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय के बाहर 10 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठा करने के निर्देश जारी कर दिए गए थे। लेकिन नतीजों के साथ ही कांग्रेस की सारी उम्मीदें धाराशाई हो गई। अपनी ही टीम के जरिए गुमराह किए जाने के बाद राहुल गांधी ने पद छोड़ने का फैसला किया। रिपोर्ट के मुताबिक राहुल फिलहाल इंग्लैंड में हैं और 19 जून को अपने जन्मदिन और संसद सत्र से पहले वापस आ जाएंगे।

प्रवीण चक्रवर्ती और दिव्या स्पंदना पर भरोसा

लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी के सबसे भरोसेमंद सलाहकार थे प्रवीण चक्रवर्ती। राहुल के चुनावी मैनेजमेंट, डेटा एनालिसिस और शक्ति ऐप की देखरेख उन्हीं के जिम्मे थी। चुनाव नतीजों के अगले ही दिन से उनसे संपर्क करने की सारी कोशिशें नाकाम हुई हैं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को निराशा ही हाथ लगी है। प्रवीण ने कांग्रेस को चुनावी डेटा की वो हार्ड डिस्क भी नहीं सौंपी है जिसके बदले उन्होंने कथित रूप से पार्टी से 24 करोड़ रुपये लिए थे।    

कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय में काम कर रहे आठ में से चार लोगों ने इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड दिव्या स्पंदना का भी यही हाल है। रिपोर्ट के मुताबिक उनके आलोचक बताते हैं कि उन्होंने पार्टी से करीब आठ करोड़ रुपये लिए और अब पहुंच से बाहर हैं।

164-184 सीटें जीतने का अनुमान

संडे गार्जियन लाइव ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि प्रवीण चक्रवर्ती 21 मई को राजीव गांधी की डेथ एनिवर्सरी पर राहुल गांधी से मिले थे। चक्रवर्ती ने राहुल को 184 संभावित विजेताओं की सूची सौंपी थी। इसमें संबंधित निर्वाचन क्षेत्र और जीत का अनुमानित मार्जिन भी शामिल था। कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय द्वारा डेटा की दोबारा जाँच की गई और राहुल ने अपने कार्यालय से कहा कि लगभग 100 पहली बार सांसदों' की सूची बनाएं, जिनसे वह परिचित नहीं थे। दूसरी लिस्ट मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन बंसल, हरीश रावत और अजय माकन जैसे नेताओं की बनाई गई जिसे वो नई सरकार में शामिल करना चाहते थे। 

एमके स्टालिन को गृह मंत्रालय

मतगणना से एक दिन पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने प्रवीण चक्रवर्ती के डेटा पर भरोसा किया और पार्टी के दिग्गज नेताओं और सहयोगी पार्टियों से संपर्क करना शुरू कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी ने एमके स्टालिन को अपने कैबिनेट में शामिल करने का ऑफर दिया तो उन्होंने गृह मंत्रालय देने की इच्छा जताई। शरद पवार से अनुरोध किया गया था कि वे डिस्पेंसेशन का हिस्सा बनें, क्योंकि उनकी उपस्थिति गंभीरता देगी।'

अखिलेश का अनुमान भी 40 पार

रिपोर्ट के अनुसार 'उत्तर प्रदेश में महागठबंधन कितनी सीटें जीत रहा था, यह पूछे जाने के बाद अखिलेश यादव को महत्वपूर्ण कैबिनेट सीट ऑफर की गई थी। अखिलेश यादव ने यह आंकड़ा 40-प्लस पर रखा और राज्य में कांग्रेस की संख्या के लिए कहा कि पार्टी नौ सीट जीत रही है, जिसमें रायबरेली और अमेठी के अलावा कानपुर, उन्नाव, फतेहपुरी सीकरी आदि शामिल थी।' 

जीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी योजना

राहुल गांधी जीत को लेकर इतने आश्वस्त थे कि मतगणना के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के आयोजन की भी योजना बना ली गई थी। राहुल गांधी के करीबी सलाहकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री के. राजू ने राष्ट्रपति के सामने सरकार का दावा पेश करने के लिए दो ड्राफ्ट बनवा लिए थे। लेकिन जैसे-जैसे मतगणना के आंकड़े सामने आने लगे राहुल गांधी के उम्मीदों पर पानी फिर गया। 

इसलिए पड़ी मुख्यमंत्रियों को फटकार

संडे गार्जियन लाइव के सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कांग्रेस मुख्यमंत्रियों को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके पीछे का कारण भी यही है कि दो हफ्ते पहले इन मुख्यमंत्रियों ने संख्या को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष को गुमराह किया था। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 25 में से 14-16 सीटें दे रहे थे लेकिन उनका बेटा भी चुनाव नहीं जीत सका। मध्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ 29 में से 11-15 सीट दे रहे थे लेकिन सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल हुई। सिर्फ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ग्राउंट रियलिटी बताते हुए कांग्रेस पार्टी के तीन सीटें जीतने का अनुमान लगाया था।

साफ तौर पर कहा जा सकता है कि राहुल गांधी को गुमराह किया गया और उन्हें अपने ही लोगों ने धोखा दिया। इसलिए दबाव में आकर राहुल गांधी ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। अब जबकि प्रधानमंत्री पद की उम्मीदें बिखर गई हैं, ऐसे में राहुल गांधी नरेंद्र और बीजेपी के खिलाफ लड़ाई के नेतृत्व का जिम्मा भी किसी और के लिए छोड़ना चाहते हैं।

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