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सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील को दी क्लीन चिट, जानें इस विवाद से जुड़ी 10 बड़ी बातें

By पल्लवी कुमारी | Updated: December 14, 2018 14:35 IST

राफेल डील के जांच को सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने रंजन गोगोई कहा, 'हम सरकार को 126 विमान खरीदने पर विवश नहीं कर सकते, और यह सही नहीं होगा कि कोर्ट केस के हर पहलू की जांच करे।

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सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे की जांच से जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने एकमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि इस सौदे में दखल देने का कोई कारण नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार की बुद्धिमत्ता पर जजमेंट लेकर नहीं बैठ सकते। इसके अलावा ऑफसेट पार्टनर चुनने के लिए पक्षपात करने के लिए सबूत का अभाव बताया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के. एम. जोसेफ की पीठ ने इस मामले में दायर याचिकाओं पर 14 नवंबर को सुनवाई पूरी की थी।

राफेल सौदे को लेकर विवाद बढ़ने के बीच फ्रांस से 58000 करोड़ रुपये की लागत से भारत के 36 लड़ाकू विमानों को खरीदने के समूचे मामले को समझते हैं। तो आइए जानते हैं कि पिछले कुछ महीनों से जिस डील को लेकर इतना विवाद हुआ है, उससे जुड़ी 10 बातें....

1 - राफेल डील को  सुप्रीम कोर्ट ने दी क्लीन चिट 

पहले बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील को  क्लीन चिट दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने रंजन गोगोई कहा, 'हम सरकार को 126 विमान खरीदने पर विवश नहीं कर सकते, और यह सही नहीं होगा कि कोर्ट केस के हर पहलू की जांच करे। राफेल की कीमत की तुलना करना सुप्रीम कोर्ट का काम नहीं है। 

2- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने क्या कहा? 

राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस की जमकर खिचाई की है। अमित शाह ने कहा कांग्रेस ने जिस तरह राफेल सौदे को लेकर आरोप लगाया था ठीक उसी तरह उनको देश की जनता से माफी मांग लेनी चाहिए। अमित शाह ने कहा- कांग्रेस ने राफेल डील को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। 

3- राफेल विमान की कीमत

प्रति राफेल विमान की कीमत का विवरण आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया गया था, लेकिन तत्कालीन संप्रग सरकार ने संकेत दिया था कि सौदा 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर का होगा। कांग्रेस ने प्रत्येक विमान की दर एवियोनिक्स और हथियारों को शामिल करते हुए 526 करोड़ रुपये (यूरो विनिमय दर के मुकाबले) बताई थी।

4- क्या है नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा किया गया सौदा 

फ्रांस की अपनी यात्रा के दौरान, 10 अप्रैल 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि सरकारों के स्तर पर समझौते के तहत भारत सरकार 36 राफेल विमान खरीदेगी। घोषणा के बाद, विपक्ष ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की मंजूरी के बिना कैसे इस सौदे को अंतिम रूप दिया। मोदी और तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलोंद के बीच वार्ता के बाद 10 अप्रैल, 2015 को जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि वे 36 राफेल जेटों की आपूर्ति के लिए एक अंतर सरकारी समझौता करने पर सहमत हुए।

5-  राफेल डील को लेकर भारत और फ्रांस का अंतिम सौदा?

भारत और फ्रांस ने 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए 23 सितंबर, 2016 को 7.87 अरब यूरो (लगभग 5 9, 000 करोड़ रुपये) के सौदे पर हस्ताक्षर किए। विमान की आपूर्ति सितंबर 2019 से शुरू होगी।

6- कांग्रेस ने इसकी कीमतों पर भी उठाए कई सवाल

कांग्रेस ने विमान की कीमत और कैसे प्रति विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,670 करोड़ रुपये की नरेन्द्र मोदी सरकार पर आरोप लगाया था। 

7- नरेन्द्र मोदी सरकार ने राफेल की कीमत बताने से किया इंकार

विपक्ष ने नरेन्द्र मोदी सरकार से राफेल के कीमतों का ब्यौरा मांगा था लेकिन मोदी सरकार ने भारत और फ्रांस के बीच 2008 समझौते के एक प्रावधान का हवाला देते हुए विवरण साझा करने से इंकार कर दिया था।

8- राफेल डील में लगा सीबीआई का तड़का 

सीबीआई के नंबर एक अधिकारी राकेश अस्थाना और नंबर दो अधिकारी आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वह सीबीआई के कामकाज में दखल दे रहे हैं। पार्टी ने यह सवाल भी किया कि क्या सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को इसलिए ‘‘बर्खास्त’’ किया गया क्योंकि वह राफेल घोटाले में ‘‘भ्रष्टाचार की परतों’’ की जांच करना चाह रहे थे।

9- राफेल विवाद पर क्या कहते हैं वायुसेना के चीफ बीएस धनोआ

वायुसेना के चीफ बीएस धनोआ ने नरेन्द्र मोदी सरकार का बचाव किया था। वायुसेना चीफ बीएस धनोआ ने राफेल को एक अच्छा पैकेज बताया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा विमान उपमहाद्वीप के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

बीएस धनोआ ने राफेल डील को बोल्ड बताते हुए कहा था राफेल और S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम डील बूस्टर डोज के समान है। उन्होंने कहा कि सरकार जैसे ही S-400 एयर डिफेंस सिस्टम डील को मंजूरी देगी, यह 24 महीनों में हमें मिलने लगेगा। 

10- राफेल के साथ अनिल अंबानी का विवाद

कांग्रेस पार्टी का ये भी आरोप है कि राफेल की डील मोदी सरकार ने अनिल अंबानी को क्यों दी है? राहुल गांधी का कहना है कि जिसकी कंपनी ने कभी कोई हथियार बनाई ही नहीं, उसको इतना बड़ा डील कैसे दे दी गई।

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