पटना: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ शकील अहमद के द्वारा मंत्री और जदयू के कद्दवार नेता अशोक चौधरी से मुलाकात किए जाने से सियासी पारा चढ़ गया है। सियासी गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि डॉ शकील अहमद जदयू की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। वहीं, डा. शकील अहमद के द्वारा अशोक चौधरी से मुलाकात के बाद जदयू विधान पार्षद खालिद अनवर ने उन्हें बधाई देते हुए उन्हें एक अच्छा और बेबाक नेता बताया है। खालिद अनवर ने कहा कि बहुत बहुत बधाई जनाब डॉ शकील अहमद साहब, नया साल नई सोच और नई उमंग।
उन्होंने कहा कि आप ने हमेशा जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी की प्रशंसा की है, उनकी नीतियों के मद्दाह रहे हैं आप से आप के आवास पर मिलकर खुशी हुई। उन्होंने कहा कि डॉ शकील अहमद एक अच्छे और बेबाक लीडर हैं। मैं उनकी सियासी समझ का शुरू से कायल रहा हूं। खालिद अनवर ने कहा कि नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद की बनाई पार्टी की राहुल गांधी दुर्गति कर रहे हैं।
खालिद अनवर ने कहा कि इंडियन नेशनल कांग्रेस, एक पुरानी पार्टी जिसको पंडित जवाहरलाल नेहरू ने, मौलाना अबुल कलाम आजाद ने और देश के बड़े-बड़े नेताओं ने जिस पार्टी को सींचा, उस पार्टी की दुर्गति राहुल गांधी जी कैसे बना रहे हैं। किस तरह उन्होंने अपनी कांग्रेस पार्टी को अपने परिवार की पार्टी बना दिया है और ऐसे नेताओं से डर रहे हैं जिनकी जमीन पर पकड़ है, जो चाहते हैं कि राष्ट्रहित में काम हो, देशहित में काम हो, ऐसे नेताओं को साइडलाइन करके इंडियन नेशनल कांग्रेस एक तरह से देश का नुकसान पहुंचा रही है।
वहीं राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि शकील साहब देश के गृह राज्य मंत्री रहे। कांग्रेस पार्टी ने बड़ी ओहदा दिया, बड़ा सम्मान भी दिया। अब उम्र के इस पड़ाव पर आ गए हैं, अब उनका काम कुछ जो है बदल रहा है और वो चाह रहे हैं कि हम अपना आइडियोलॉजी चेंज कर दें, विचारधारा चेंज कर दें। अब मान लीजिए जिधर जाना चाहते हैं उधर तो कुछ मिल जाए, सुरक्षा-उरक्षा मिल गया होगा, बढ़ा दिया गया होगा। तो पहले तो दाल में काला था न, अब तो काला में दाल है। बचा कहां कुछ है? तो ऐसे तो होते ही रहता है, सुविधा की राजनीति करने वालों को, संघर्ष का विनाश आता है।
जबकि कांग्रेस के विधान पार्षद समीर सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हो सकता है, वो राजनैतिक व्यक्ति हैं, वो चुप तो नहीं बैठेंगे। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने उनको सम्मान दिया, वो तो हमलोगों को प्राप्त नहीं हो सका। हमारा भी तीन पीढ़ियों से योगदान है कांग्रेस में। दादा आजीवन मेंबर ऑफ पार्लियामेंट रहे, पिताजी मिनिस्टर रहे, नेहरू जी के बड़े करीबी हमारे दादा जी रहे। लेकिन इसके बावजूद भी तीसरी पीढ़ी में उनको जितना सम्मान मिला, उतना हमको लगता है कि राज्य में किसी कांग्रेसी नेता को नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि जबकि हमलोग संगठन में किसी से भी ज्यादा काम किए हैं, खुद 47 वर्ष से काम कर रहे हैं। लेकिन उनको चंद समय में बिहार सरकार का मंत्री बनाना, प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाना, कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बनाना, केंद्रीय गृह मंत्री बनाना, ये सब बड़ी-बड़ी जिम्मेवारी हुई है। तो वैसी परिस्थिति में उनको कांग्रेस के विरुद्ध या राहुल गांधी के विरुद्ध, नेहरू परिवार के विरुद्ध नहीं बोलना चाहिए था। उनको दूसरे दल में जाना था तो चले जाते उसमें कोई दिक्कत नहीं है। वो भद्र आदमी हैं, बोलचाल में भी अच्छा हैं। लेकिन अब कैसे उनकी भाषा बदल गई ये समझ से परे है। भगवान उनको सद्बुद्धि दे, मेरी शुभकामना है।