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MP Exam: एमपी में एक सरकार, एक विभाग, दो एग्जाम एजेंसी, नतीजे अजब गजब

By अनुराग.श्रीवास्तव@लोकमत.इन | Updated: January 19, 2024 19:01 IST

मध्य प्रदेश में एग्जाम करने वाली दो अलग-अलग एजेंसियां अब सवालों के घेरे में है। एक ही विभाग से संबंध दो एजेंसियों में से एक परीक्षा के बाद नतीजे घोषित कर रही है तो दूसरी में लाखों छात्रों का भविष्य अटका हुआ है।

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ठळक मुद्देएमपी में आयोजित भर्ती परीक्षाओं के नतीजों के लिए कितना इंतजारआधा दर्जन भर्ती परीक्षाओं के नतीजे लंबे समय से अटके

मध्य प्रदेश को यूं ही अजब गजब नहीं कहा जाता, यहां का सिस्टम अजब गजब है। सरकार के युवाओं को नौकरी देने के दावों और वादों के बीच लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

 मध्य प्रदेश में सरकारी पदों पर भर्ती के लिए दो अलग-अलग एजेंसियां हैं। एक मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग जिसके जरिए उच्च पदों पर भारती की जाती है। इस एजेंसी के द्वारा परीक्षाएं आयोजित की गई और अब उनके नतीजे भी घोषित हो रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ कर्मचारी चयन मंडल एजेंसी है जिसमें आधा दर्जन से ज्यादा भर्ती परीक्षाओं के नतीजे अटके हुए हैं।

 अब हम आपको बताते हैं की सरकार की दो अलग-अलग एजेंसियों के अलग-अलग कहानी...

 मध्य प्रदेश में अब मोहन यादव मुख्यमंत्री हैं। मोहन यादव के पास सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल जैसी संस्थाएं हैं। जो सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित करने के साथ नतीजे घोषित करती हैं। लेकिन एक तरफ एमपीपीएससी के द्वारा आयोजित परीक्षाओं के नतीजे घोषित हो रहे हैं तो दूसरी तरफ कर्मचारी चयन मंडल में सीधी भर्ती के लिए आयोजित परीक्षाओं के नतीजे अटके हुए हैं।

 एमपीपीएससी ने भर्ती परीक्षाओं के नतीजे घोषित करने का फार्मूला ईजाद किया है। एमपीपीएससी ने सरकारी नौकरियों में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण मामले को देखते हुए 87 फ़ीसदी पदों के नतीजे घोषित किये। जबकि 13 फीसदी पदों की चयन सूची मामले में अदालत के अंतिम आदेश के बाद घोषित करने का फैसला लिया।  

लेकिन कर्मचारी चयन मंडल में इस फार्मूले को अब तक लागू नहीं किया जा सका  है। जिसके कारण पटवारी भर्ती,वनरक्षक भर्ती, पुलिस कांस्टेबल भर्ती, कृषि विस्तार अधिकारी जैसे विभागों में भर्तियां अटकी हुई है। कर्मचारी चयन मंडल इनके नतीजे घोषित नहीं कर पा रहा है।  इसकी वजह से 25 लाख युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

 सवाल यह है कि जब एक ही विभाग के अधीन आने वाली दो संस्थाएं हैं तो दोनों में अलग-अलग नियम प्रक्रिया क्यों लागू किया जा रहे हैं। और आखिर क्यों लाखों युवा का सरकारी विभाग में सेवा देने का ख्वाब लंबा होता जा रहा है। 

 

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