NPS Health Pension Scheme: एक उम्र के बाद जब कमाई के रास्ते कम होने लगते हैं, तब सबसे बड़ी चिंता होती है बीमारी और दवाओं का खर्च। इसी चिंता को दूर करने के लिए NPS में अब स्वास्थ्य सुरक्षा के पहलुओं को जोड़ा जा रहा है। सरकार की इस नई पहल से अब बुजुर्गों को इलाज के लिए किसी का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा। इसके लिए पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत एक नई पहल शुरू की है।
इसे NPS हेल्थ पेंशन स्कीम कहा जाता है। फिलहाल, इसे रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क के तहत प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट (PoC) के तौर पर लॉन्च किया गया है। इस स्कीम का मकसद पेंशन के अलावा स्वास्थ्य खर्चों के लिए फाइनेंशियल मदद देना है।
यह स्कीम सीमित समय और कंट्रोल्ड दायरे में लागू की जा रही है। यह आउटपेशेंट और इनपेशेंट इलाज के खर्चों के लिए मदद देगी। यह स्कीम मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत काम करेगी और इसमें हिस्सा लेना पूरी तरह से ऑप्शनल होगा। कोई भी भारतीय नागरिक इसमें योगदान कर सकता है।
PFRDA की मंज़ूरी के बाद पेंशन फंड (PFs) इस स्कीम को लागू करेंगे। यह पहल सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियों (CRAs), हेल्थ बेनिफिट एडमिनिस्ट्रेटर (HBAs), या थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPAs) के साथ मिलकर लागू की जाएगी। ज़रूरत पड़ने पर फिनटेक कंपनियाँ भी इस पायलट प्रोजेक्ट में हिस्सा ले सकती हैं। टेस्टिंग के लिए, NPS से निकलने और पैसे निकालने से जुड़े कुछ नियमों में ढील दी गई है।
सब्सक्राइबर इस स्कीम में अपनी मर्ज़ी से कोई भी रकम जमा कर सकते हैं। यह पैसा MSF नियमों के अनुसार इन्वेस्ट किया जाएगा। 40 साल से ज़्यादा उम्र के लोग अपने NPS कॉमन अकाउंट का ज़्यादा से ज़्यादा 30% इस हेल्थ पेंशन स्कीम में ट्रांसफर कर सकते हैं।
सब्सक्राइबर मेडिकल खर्चों के लिए अपनी जमा रकम का 25% तक निकाल सकते हैं। हालांकि, पहली निकासी तभी संभव होगी जब अकाउंट में कम से कम ₹50,000 का कॉर्पस हो।
अगर किसी एक इलाज का खर्च कुल जमा रकम के 70% से ज़्यादा हो जाता है, तो पूरी रकम एक साथ निकाल ली जाएगी। पेमेंट सीधे हॉस्पिटल या HBA/TPA को किया जाएगा। बची हुई रकम NPS कॉमन अकाउंट में वापस कर दी जाएगी।
PFRDA ने यह भी साफ किया है कि एक मज़बूत शिकायत निवारण सिस्टम बनाया जाएगा। इसके अलावा, सब्सक्राइबर डेटा को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के तहत सुरक्षित रखा जाएगा, और डेटा शेयरिंग के लिए डिजिटल सहमति ज़रूरी होगी। यह पायलट प्रोजेक्ट पेंशन और स्वास्थ्य लाभों को इंटीग्रेट करने की संभावना का टेस्ट करेगा। अगर यह सफल होता है, तो भविष्य में इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।