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नागरिकता संशोधन कानून का नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं, सरकार के सामने आई ये अड़चन!

By आदित्य द्विवेदी | Updated: December 20, 2019 13:03 IST

यह कानून फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक गृहमंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार नोटिफिकेशन के लिए विशेषज्ञों की सलाह लेगी। 

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ठळक मुद्देनागरिकता संशोधन कानून से जुड़ी 59 याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी के लिए लिस्ट किया है। नोटिफिकेशन के नियमों को कानूनी तौर पर चुनौती दी जा सकती है इसलिए सरकार 22 जनवरी तक का इंतजार करेगी।

नागरिकता संशोधन कानून को लागू होने में अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। सरकार ने इसके नियमों को लेकर अभी तक कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। यह कानून फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक गृहमंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकार नोटिफिकेशन के लिए विशेषज्ञों की सलाह लेगी। 

आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून से जुड़ी 59 याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी के लिए लिस्ट किया है। इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली खंड पीठ करेगी। इसमें जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्य कांत भी शामिल होंगे।

जानकारों का कहना है कि नोटिफिकेशन के नियमों को कानूनी तौर पर चुनौती दी जा सकती है इसलिए सरकार 22 जनवरी तक का इंतजार करेगी। अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट कानून पर स्टे नहीं लगाएगी जिससे गृह मंत्रालय इसका नोटिफिकेशन जारी कर सके। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नागरिकता संशोधन बिल पर 12 दिसंबर को ही हस्ताक्षर किए थे। जबकि एक हफ्ते बीत जाने के बाद भी गृह मंत्रालय ने अभी तक नियमों को लेकर नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम के अनुसार हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के जो सदस्य 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हैं और जिन्हें अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना पड़ा है, उन्हें गैरकानूनी प्रवासी नहीं माना जाएगा, बल्कि भारतीय नागरिकता दी जाएगी। 

कानून के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों के अलावा दिल्ली समेत कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले। इस कानून को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए विज्ञापन भी जारी किए हैं।

टॅग्स :नागरिकता संशोधन कानूनअमित शाह
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