नई दिल्ली, 18 जुलाई: देशभक्ति और देश सेवा का जज्बा तो हर देशवासी के खून में होता है। लेकिन ये जरूरी नहीं कि देशभक्ति और देश सेवा दिखाने के लिए आप सरहद पर जाकर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दे। हमारे बीच कई ऐसे लोग होते हैं, जो हम में से ही एक होते हैं लेकिन देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाने में बिल्कुल पीछे नहीं हटते। ऐसे ही एक शख्स थे, दिल्ली एनसीआर नोएडा में मशहूर मुकुल चंद जोशी जिनको पूरा नोएडा ट्रैफिक बाबा के नाम से जानता था।

 20 साल तक नोएडा के लोगों को ट्रैफिक रूल सिखाया

लोकमत न्यूज हिंदी के स्वतंत्रता दिवस के इस कैम्पेन #KuchhPositiveKarteHain में नोएडा के इस ट्रैफिक बाबा को हम सलाम करते हैं। इन्होंने अपनी आधी जिंदगी सड़कों पर लोगों को ट्रैफिक रूल बताने और ट्रैफिक संभालने में निकाल दी। 20 साल से नोएडा के लोगों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने वाले ट्रैफिक बाबा मुकुल चंद्र जोशी आज हमारे बीच तो नहीं हैं, लेकिन उनकी दी हुई सीख नोएडा के कई रेड लाइट पर लोगों को याद जरूर आती होगी। 

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 83 साल की उम्र में हुआ निधन

ट्रैफिक बाबा मुकुल चंद्र जोशी का निधन 83 साल की उम्र में नवंबर 2017 में हुआ। नोएडा सेक्टर-21 में रहने वाले मुकुल चंद उर्फ ट्रैफिक बाबा करीब 20 साल से शहर के लोगों को यातायात के नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित कर रहे थे। उन्हें कई बार इस कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया।

फ्लाइट इंजिनियर के पद से थे रिटायर

मूल रूप से अल्मोड़ा, उत्तराखंड के रहने वाले थे।  मुकुल चंद्र 1973 में एयरफोर्स से फ्लाइट इंजिनियर के पद से रिटायर हुए थे। वह नोएडा के सेक्टर-21 में करीब 23 साल से रह रहे थे। ट्रैफिक बाबा ने जीते जी बिना किसी स्वार्थ के देश के लोगों की तो सेवा की लेकिन वह मरने के बाद भी कई लोगों के काम आए। 

मरने के बाद सारे बॉडी पार्ट कर गए दान

ट्रैफिक बाबा के बेटे कैप्टन मनोज जोशी जो मर्चेंट नेवी सिंगापुर में हैं, उन्होंने पिछले साल बातचीत में बताया था कि उनके पिता की इच्छा थी कि मृत्यु के बाद शरीर का जो भी अंग दूसरे का काम आ सके, उसे दान कर दिया जाए।  ऐसे में उनकी मौत के बाद मां ने उन लोगों के आने से पहले ही सभी औपचारिकताएं पूरी कर पिता की दोनों आंखे और पेसमेकर दान कर दी थी। इससे वह दूसरे के जीवन में रोशनी और धड़कन दे गए।

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भतीजे की मौत के बाद बने ट्रैफिक बाबा

ट्रैफिक बाबा की पत्नी शोभा जोशी के मुताबिक करीब 15 साल पहले उनके भार्इ के जवान बेटे की नोएडा में सड़क हादसे में मौत हो गर्इ थी, क्योंकि वह बिना हेलमेट लगाए स्कूटर लेकर निकला था। जिसके चलते हादसे में सिर पर चोट आने से उसकी मौत हो गई। इस घटना ने मुकुल चंद्र जोशी को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया था। उसके बाद से ही उन्होंने लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने की ठान ली। 

लाउडस्पीकर और पम्फलेट के जरिए भी करते थे जागरूक

भतीजे के मौत के बाद से लेकर  मुकुल चंद्र जोशी का शायद ही कोई दिन ऐसा गया होगा, जिस दिन उन्होंने नोएडा की सड़कों पर निकलकर लोगों को ट्रैफिक नियम का पाठ ना पढ़ाया हो। वो चौराहों पर लाउडस्पीकर और पम्फलेट के जरिए लोगों को जागरूक करते थे। इसके अलावा यातायात पुलिस के कार्यक्रम में हिस्सा लेकर सहयोग करते थे। 

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