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सड़कों पर बिछायी गयी कीलें भाजपा के ‘राजनीतिक ताबूत’ की कीलें साबित होंगी : जयंत चौधरी

By भाषा | Updated: February 5, 2021 20:14 IST

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(आसिम कमाल)

नयी दिल्ली, पांच फरवरी राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि किसानों को नए कृषि कानूनों को निरस्त करने के सिवा कुछ भी मंजूर नहीं है और कृषकों के खिलाफ सरकार की कठोर रणनीति काम नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि सड़कों पर बिछायी गयी कीलें भाजपा के ‘‘राजनीतिक ताबूत’’ की कीलें साबित होंगी।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ किसान पंचायतों में हिस्सा ले चुके और केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ जोर-शोर से अभियान चला रहे चौधरी ने कहा कि सरकार को इन कानूनों को तुरंत वापस लेना चाहिए और किसानों की सहमति के बाद इन्हें तैयार करना चाहिए।

राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के उपाध्यक्ष ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में आरोप लगाया कि देश के मौजूदा नेतृत्व को भावनाओं की परवाह नहीं है और वह दंगे, मौत या प्रदर्शन से व्याकुल नहीं होता, क्योंकि वह अपने दायरे में सिमटा हुआ है।

पूर्व सांसद ने कहा, ‘‘यह अधिनायकवादी शासन है। वे जमीन पर मौजूद अपने राजनीतिक लोगों की भी नहीं सुनते हैं। अगर आप भाजपा के विधायक या सांसद से अनौपचारिक बातचीत करें तो पता चलेगा कि वे खुश नहीं है और वे भारत के लोगों के उठ खड़े होने को महसूस कर रहे हैं जिन्होंने (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी को वोट किया था।’’

चौधरी ने कहा कि वह किसानों के हर धरना स्थल पर गए हैं, किसानों की पंचायतों को संबोधित किया है और उन्हें लगता है कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के किसानों के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव बन गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘वे एकजुट हो रहे हैं और मुझे नहीं लगता है कि वे जिस चीज (कानूनों को निरस्त करवाने) के लिए आए हैं उसके सिवा उन्हें कुछ और मंजूर होगा।’’

रालोद नेता ने कहा कि किसान अपने गांव छोड़कर आए हैं, उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया है और ‘‘करीब 150 किसानों की मौत हो चुकी है’’ और वे सरकार का रुख कड़ा होने के बावजूद लौटना नहीं चाहते।

चौधरी ने कहा कि किसानों का रुख स्पष्ट है कि ये कानून उनके लिए नहीं बनाए गए हैं और वे इन्हें स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि कानून बनाना सरकार का विशेषाधिकार है, लेकिन जनता की इच्छा सर्वोपरि होती है।

दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन स्थल के आसपास सड़कों पर कीलें लगाए जाने और अवरोधक मजबूत किए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘ये सड़कों पर कील नहीं लगाई गई हैं, ये भाजपा के राजनीतिक ताबूत में कील की तरह हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बहुत व्यथित करने वाली तस्वीरें दुनिया के सामने गयी हैं। ये वो लोग हैं जिन्होंने दिल्ली को गोरों से आजादी दिलायी, जो मुगलों के खिलाफ लड़े। जब भी दिल्ली में कोई संकट हुआ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के किसान ही सबसे पहले वहां पहुंचे। आज दिल्ली में किसान घाट (पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का स्मारक), संसद और राजघाट हैं और आप इन चीजों को भुलाकर किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से भी रोक रहे हैं।’’

सरकार द्वारा कृषि कानूनों को 18 महीने के लिए स्थगित किए जाने के प्रस्ताव पर चौधरी ने कहा कि इस प्रस्ताव पर प्रदर्शनकारी किसान संगठनों या खुद किसानों ने भी कोई रजामंदी नहीं दिखायी।

उन्होंने कहा कि किसान सवाल पूछ रहे हैं कि 18 महीने के लिए स्थगित क्यों किया जा रहा और संसद या सरकार के काम में उच्चतम न्यायालय को क्यों शामिल किया जा रहा है।

चौधरी ने कहा कि 18 महीने बाद भी वही समस्या पैदा होगी और सरकार कहेगी कि ‘‘हमने उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दिया है इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लिहाजा न्यायपालिका और संसद में कार्यपालिका की भूमिका के बीच सामंजस्य बिगड़ेगा।’’

रालोद उपाध्यक्ष ने कहा, ‘‘मेरा सुझाव है कि उन्हें (सरकार) इन कानूनों को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए तथा और प्रभावी तरीके से किसानों से संवाद करना चाहिए। अगर वे मानते हें कि (कृषि क्षेत्र में) सुधार बहुत जरूरी है तो पहले किसानों की सहमति लेनी चाहिए तब कानून बनाने चाहिए।’’

चौधरी ने कहा कि सरकार आंदोलन से जिस तरह निपट रही है उसे लोग पसंद नहीं कर रहे। उन्होंने कहा, ‘‘सख्त रणनीति का इस्तेमाल चीन या अन्य देशों के साथ होना चाहिए जिनके साथ टकराव चल रहा है, भारत के नागरिकों से निपटने के लिए सख्त रणनीति का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।’’

अपने पिता और रालोद अध्यक्ष अजित सिंह द्वारा भारतीय किसान यूनियन को समर्थन दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर जयंत चौधरी ने कहा कि यह टिकैत बंधुओं (नरेश और राकेश टिकैत) के साथ गठबंधन नहीं है, किसानों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए समर्थन दिया गया है।

जयंत चौधरी ने कहा,‘‘हम (उत्तर प्रदेश में) योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार का सामना कर रहे हैं जहां किसी भी असहमति को ताकत का इस्तेमाल करते हुए दबा दिया जाता है। यही कारण है कि चौधरी अजित सिंह ने टिकैत बंधुओं से संपर्क किया और कहा कि ‘हम आपके साथ हैं’, आप डटे रहिए। इसका बड़ा असर पड़ा और बहुत लोग समर्थन में आ गए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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