भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार, 19 अप्रैल को राज्य के उच्चाधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक की और इस दौरान एक बड़ा फैसला लिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा है कि मध्यप्रदेश में अवैध मदरसे, संस्थान, जहाँ कट्टरता का पाठ पढ़ाया जा रहा है, उसका रिव्यू किया जायेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कट्टरता और अतिवाद बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
मध्यप्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसे लेकर सत्तारूढ़ भाजपा के अलावा अन्य दलों की सक्रियता भी बढ़ गई है। शिवराज सिंह चौहान का अवैध मदरसों को लेकर हलिया फैसला भी इसी क्रम में देखा जा रहा है।
सीएम शिवराज सिंह चौहान बुधवार को पुलिस के आला अधिकारियों के साथ राज्य की कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक कर रहे थे। इस बैठक में शिवराज सिंह चौहान अधिकारियों को अवैध मदरसों के रिव्यू के अलावा भी कई सख्त निर्देश दिए। माना जा रहा है कि चुनावी साल में सीएम शिवराज के अवैध मदरसों के रिव्यू के फैसले से राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ सकती है।
इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छत्तीसगढ़ के सह-प्रभारी नितिन नबीन भी कह चुके हैं कि मदरसे सरकारों के लिए एक "गंभीर चुनौती" पेश करते हैं क्योंकि यहां "आतंकवाद और अपराध" पढ़ाया जाता है। एएनआई से बात करते हुए नबीन ने कहा, "मैंने साफ तौर पर कहा है कि जिस तरह से मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में आतंकवाद और अपराध की शिक्षा दी जा रही है, ये जगहें सभी सरकारों के लिए गंभीर चुनौती पेश करती हैं। इस बात की जांच होनी चाहिए कि मदरसों में शिक्षक हैं या कोई और। अगर किसी मदरसे से देश की बर्बादी के नारे लग रहे हैं तो ऐसे मदरसों को बंद कर देना चाहिए।"
बीजेपी नेता ने आगे कहा कि ऐसी जगहों पर कार्रवाई होनी चाहिए जहां बम और अन्य हथियार बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही हो। उन्होंने कहा, 'अगर कोई शिक्षा देता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यह देश के विकास में योगदान होना चाहिए।
बता दें कि मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों को लेकर ये चर्चा हो रही थी कि भाजपा चुनाव से पहले चेहरा बदल सकती है। हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने साफ किया था कि अगला विधानसभा चुनाव भी शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बयान के बाद ऐसी चर्चाओं पर विराम लग सकता है।