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Mission Mausam Unveiled: बाढ़ और सूखे से राहत की उम्मीद?, क्या है ‘मिशन मौसम’ और क्यों जरूरत, जानें उद्देश्य और कितना आएगा खर्च

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 13, 2024 16:45 IST

Mission Mausam Unveiled: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के मुताबिक, वायुमंडल की प्रक्रियाओं की जटिलता और वर्तमान अवलोकन तथा मॉडल रेजोल्यूशन की सीमाओं के कारण उष्णकटिबंधीय मौसम का पूर्वानुमान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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ठळक मुद्देMission Mausam Unveiled: अवलोकन डेटा पर्याप्त नहीं हैं।Mission Mausam Unveiled: पांच वर्षीय मिशन दो चरणों में लागू किया जाएगा।Mission Mausam Unveiled: पहला चरण मार्च 2026 तक जारी रहेगा।

Mission Mausam Unveiled: जलवायु संकट के कारण मौसम के चलन को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के मद्देनजर भारत ने मौसम की समझ को और ज्यादा सार्थक बनाने तथा नेटवर्क के अवलोकन में विस्तार, मॉडलिंग को बेहतर बनाने और एआई (कृत्रिम बुद्धिमता) व ‘मशीन लर्निंग’ के माध्यम से पूर्वानुमान लगाने की दिशा में ‘मिशन मौसम’ के साथ एक बड़ा कदम उठाया है। इस मिशन के तहत कृत्रिम रूप से बादल विकसित करने के लिए प्रयोगशाला बनाना, रडार की संख्या में 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि करना तथा नये उपग्रह, सुपर कंप्यूटर और बहुत कुछ नयी चीजें जोड़ना शामिल होगा।

क्यों है इसकी जरूरत? पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के मुताबिक, वायुमंडल की प्रक्रियाओं की जटिलता और वर्तमान अवलोकन तथा मॉडल रेजोल्यूशन की सीमाओं के कारण उष्णकटिबंधीय मौसम का पूर्वानुमान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अवलोकन डेटा पर्याप्त नहीं हैं और संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (एनडब्ल्यूपी) मॉडल का क्षैतिज रेजोल्यूशन भारत में छोटे पैमाने की मौसम घटनाओं का सटीक पूर्वानुमान लगाना मुश्किल बनाता है। एनडब्ल्यूपी मॉडल फिलहाल 12 किलोमीटर तक फैला है।

साथ ही जलवायु परिवर्तन, वातावरण को और अधिक अव्यवस्थित बना रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा और स्थानीय स्तर पर सूखा पड़ रहा है। इतना ही नहीं कुछ स्थान बाढ़ और सूखे की एक साथ चुनौती का सामना कर रहे हैं। बादल फटना, आंधी, बिजली गिरना और तूफान भारत में सबसे कम समझी जाने वाली मौसमी घटनाओं में से हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, इस जटिल स्थिति को समझने के लिए बादलों के भीतर और बाहर, सतह पर, ऊपरी वायुमंडल में, महासागरों के ऊपर और ध्रुवीय क्षेत्रों में होने वाली भौतिक प्रक्रियाओं के बारे में गहन ज्ञान की आवश्यकता होती है। मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए पृथ्वी की गतिशील प्रणालियों की प्रभावी निगरानी के लिए बेहतर स्थानिक और वर्टिकल रेजोल्यूश्न के साथ जमीनी स्तर पर तथा पृथ्वी प्रणाली में उच्च आवृत्ति अवलोकन की आवश्यकता है। इसके अलावा पंचायत स्तर पर पूर्वानुमान लगाने के लिए एनडब्ल्यूपी मॉडल के क्षैतिज रेजोल्यूशन को 12 किलोमीटर से बढ़ाकर छह किलोमीटर करना होगा।

अगले पांच वर्षों में क्या होगा? केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने कहा कि यह पांच वर्षीय मिशन दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहला चरण मार्च 2026 तक जारी रहेगा और इसमें अवलोकन नेटवर्क के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें लगभग 70 डॉपलर रडार, उच्च दर्जे के कंप्यूटर और 10 विंड प्रोफाइलर तथा 10 रेडियोमीटर लगाना शामिल है। दूसरे चरण में अवलोकन क्षमताओं को और बढ़ाने के लिए उपग्रहों और विमानों को जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

मुख्य उद्देश्य क्या हैं? मिशन मौसम का उद्देश्य लघु से मध्यम अवधि के मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में पांच से 10 प्रतिशत तक सुधार करना तथा सभी प्रमुख महानगरों में वायु गुणवत्ता की भविष्यवाणी में 10 प्रतिशत तक सुधार करना है।

टॅग्स :मौसम रिपोर्टभारतीय मौसम विज्ञान विभागमौसमबाढ़जितेन्द्र सिंह
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