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Madhya Pradesh: अपने प्रदेश लौटे मज़दूरों की दोहरी दुर्गती, पुरुष शौचालय में ठहरने को मजबूर महिलाएं

By अजीत कुमार सिंह | Updated: May 26, 2020 20:53 IST

शिवपुरी में पुरुष शौचालय में महिलाएं और छोटी बच्चियां शरण लिये हुए हैं. प्रशासन का कहना है कि प्रवासियों के रहने का इंतज़ाम तो हमने गोदाम में किया था, ये लोग शौचालय में कैसे आ गये ये जांच का विषय है.

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ठळक मुद्देकुछ दिनों पहले राजस्थान के कोटा से छात्रों को वापस बुलाकर एमपी और देश की कई सरकरों ने फोटो सेशन में कोई कमी नहीं छोड़ी थी.रविवार को भी मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 200 से ज्यादा मज़दूरों को बसें इसी कोटा बॉर्डर पर उतार कर लौट गईं.

शिवपुरी/भोपालः सरकारी सी दिख रही एक इमारत पर पुरूष शौचालय लिखा है. हालांकि उसका रंग काफी हद तक उड़ चुका है. हालत वैसी ही है जैसी आम जनता के लिए बनी सरकारी इमारतों की होती है. भले ही ये पुरुष शौचालय है लेकिन उसके दरवाज़े के बाहर महिलाएं और छोटी बच्चियां शरण लिये हुए हैं.

कुछ छोटी बच्चियां शौचालय के बाहर खेल रही है. कुछ ऐसी ही हालत महिला शौचालय के बाहर भी है. शौचालय का दरवाज़े के बाहर प्रवासी मज़दूरों अपने सामान सहित लेटे हैं. पुरुष शौचालय के सामने लगभग 13 लोग लेटे हुए हैं जिसमें 8 महिलाएं हैं. 

इन इमारतों और इंतज़ामों की हालत बेहद सरकारी है. प्रवासी मज़दूरों की दुर्गति के किस्सों में ये एक नया एपिसोड है या यूं कहें सरकारी बेकद्री का नया मुकाम है. ये मध्यप्रदेश के शिवपुरी ज़िले में प्रवासी मज़दूरों के रहने का इंतज़ाम की एक छोटी सी कहानी थी.

जब इस बदइंतज़ामी पर शिवपुरी के एडिशनल कलेक्टर आर एस बालोदिया से सवाल किया गया तो वो बोले कि इन प्रवासियों के रहने का इंतज़ाम तो हमने गोदाम में किया था. ये लोग शौचलय में कैसे आ गये ये जांच का विषय है. हम इसकी  जांच करेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे.  

ऐसा नहीं है कि सबके संग यहीं सुलूक होता है. कुछ दिनों पहले राजस्थान के कोटा से छात्रों को वापस बुलाकर एमपी और देश की कई सरकरों ने फोटो सेशन में कोई कमी नहीं छोड़ी थी. इसी शहर शिवपुरी में जब कोटा से छात्र लौटे थे तो उनका मेहमानों जैसी आवभगत की गयी थी. लेकिन इस बार कोटा से जब ये मज़दूर लौटे तो इन्हें आराम करने के लिए शौचालय नसीब हुआ. 

छात्रों के मामले में अधिकारी नेता सबने पलके बिछाई थी. जब इन मज़दूरों की बारी आई तो सरकार को पता तक नहीं है कि वो शौचालय में ठहरे हुए हैं. खाने पीने के इंतज़ाम तो दूर की बात है. ये मजदूर वहीं शौचालय के बाहर खाना बनाने के लिए मजबूर हैं. 

स्थानीय मीडिया के अनुसार एक महिला ने बताया कि हमें जयपुर से बसें 3 बजे रात को यहां उतार कर चली गई. हमने अगले दिन दोपहर तक यहीं इंतज़ार किया. हमारे साथ छोटे बच्चे है इस लिए पैदल चलना मुश्किल हैं, इस लिए मजबूरी में शौचालय में रुकना पड़ा

स्थानीय मीडिया के अनुसार एमपी के मजदूरों के राजस्थान की बसें कोटा सीमा पर ही छोड़ देती हैं. रविवार को भी मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 200 से ज्यादा मज़दूरों को बसें इसी कोटा बॉर्डर पर उतार कर लौट गईं. बताया जा रहा है कि सोमवार तक इन मज़दूरों ने शौचालय में ही जैसे-तैसे गुज़ारा किया फिर सरकारी बसें आई और इन्हें उनके जिलों तक ले गईं. कोटा नाका बॉर्डर पर मजदूरों को 12 घंटे तक बसों की राह देखनी पड़ती है. 

मध्य प्रदेश में अब तक 6859 कोरोनावायरस के कन्फर्म केस हैं. जिनमें से 2988 लोग अभी भी संक्रमित है. अब तक मध्य प्रदेश में 3571 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं जबकि कोविड 19 ने 300 लोगों की जान ले ली है.

टॅग्स :प्रवासी मजदूरकोरोना वायरस लॉकडाउनकोरोना वायरसमध्य प्रदेश में कोरोनाशिवराज सिंह चौहान
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