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Simran Bala: 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व?, राजौरी के लोग बिटिया सिमरन बाला की प्रेरणादायक यात्रा पर मना रहे जश्न?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 25, 2026 21:10 IST

परिवार ने इस पल को अपार गर्व का क्षण बताया और कहा कि बाला की उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित किया है और सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा है।

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ठळक मुद्देनौशेरा के सीमावर्ती गांव से कर्तव्य पथ तक का उनका सफर चुनौतीपूर्ण रहा है।सीआरपीएफ की महिला अधिकारियों ने गणतंत्र दिवस के विभिन्न दलों का नेतृत्व किया है। हमेशा उम्मीद की थी लेकिन कभी सोचा नहीं था कि यह सच होगा।

राजौरीः जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा से कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित राजौरी के लोग इस गणतंत्र दिवस पर एक विशेष उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए उत्सुक हैं। जिले के एक सीमावर्ती गांव की रहने वाली सिमरन बाला 26 जनवरी को दिल्ली में कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ की एक पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 26 वर्षीय सहायक कमांडेंट जिले की पहली महिला हैं जिन्होंने देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल में अधिकारी रैंक में शामिल होने का गौरव प्राप्त किया है। उनके परिवार ने इस पल को अपार गर्व का क्षण बताया और कहा कि बाला की उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित किया है और सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा है।

उनकी बहन शैल बाला ने कहा, "नौशेरा के सीमावर्ती गांव से कर्तव्य पथ तक का उनका सफर चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन उन्होंने हम सभी को गौरवान्वित किया है।" नौशेरा सेक्टर के उनके गांव में रिश्तेदार और शुभचिंतक परेड से पहले परिवार को बधाई देने के लिए उनके घर आ रहे हैं। हालांकि ऐसे उदाहरण हैं जब सीआरपीएफ की महिला अधिकारियों ने गणतंत्र दिवस के विभिन्न दलों का नेतृत्व किया है,

लेकिन यह पहली बार है कि कोई महिला अधिकारी वार्षिक राष्ट्रीय आयोजन के दौरान 140 से अधिक पुरुष कर्मियों के दल की कमान संभालेगी। सिमरन बाला के माता-पिता और परिवार के सदस्य उन्हें सीआरपीएफ टुकड़ी का नेतृत्व करते देखने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसे एक ऐसा क्षण बता रहे हैं जिसकी उन्होंने हमेशा उम्मीद की थी लेकिन कभी सोचा नहीं था कि यह सच होगा।

बाला के पिता विनोद चौधरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “ एक अभिभावक के तौर पर यह मेरे लिए गर्व का दिन है। बाला की यह उपलब्धि उसकी कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा है। सीमा के पास रहने से भी उसका हौसला नहीं टूटा; उसने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत की।”

उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह साबित करती है कि दृढ़ता और कड़ी मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। चौधरी ने कहा, "वह परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं जिन्होंने सुरक्षा बल में शामिल होकर राष्ट्र की सेवा की है, और उनकी उपलब्धि दूसरों को भी इसी राह पर चलने के लिए प्रेरित करेगी।"

बाला की मां, सृष्टि देवी ने कहा कि वह अपनी बेटी की कामयाबी से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा, “मैं सभी अभिभावकों से आग्रह करती हूं कि वे अपनी बेटियों का साथ दें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी पहल रंग ला रही हैं और बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं - उन्हें बस प्रोत्साहन और समर्थन की जरूरत है।” 

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