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मुझे और मेरे परिवार को नजरबंद किया गया : उमर अब्दुल्ला

By भाषा | Updated: February 14, 2021 20:38 IST

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श्रीनगर, 14 फरवरी नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने रविवार को दावा किया कि उन्हें और उनके पिता एवं सांसद फारूक अब्दुल्ला समेत परिवार के सदस्यों को अधिकारियों ने नजरबंद कर दिया है।

हालांकि पुलिस ने कहा कि पुलवामा हमले की दूसरी बरसी के संदर्भ में मिली खुफिया जानकारी के मद्देनजर सुरक्षा घेरे में आने वाले लोगों की गतिविधि रविवार को ‘‘हतोत्साहित’’ की गई।

उमर ने ट्वीट किया, ‘‘यह अगस्त 2019 के बाद नया जम्मू कश्मीर है। हमें बिना कोई कारण बताए, हमारे घरों में बंद कर दिया गया है। इससे बुरा और क्या हो सकता है कि उन्होंने मुझे और मेरे पिता (मौजूदा सांसद) को हमारे घर में बंद कर दिया है, उन्होंने मेरी बहन और उनके बच्चों को भी उनके घर में बंद कर दिया है।’’

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने तस्वीरें भी साझा कीं, जिनमें यहां शहर के गुपकर इलाके में उनके आवास के मुख्य द्वार के बाहर पुलिस की गाड़ियां खड़ी दिखाई देती हैं।

उमर ने आरोप लगाया कि उनके घर में काम करनेवाले लोगों को भी अंदर नहीं आने दिया जा रहा।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट किया, ‘‘चलो, लोकतंत्र के आपके नए मॉडल का मतलब है कि हमें कोई कारण बताए बिना हमारे घरों में बंद रखा जाए और हमारे घर में काम करनेवाले कर्मियों को भी अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाए। इसके बाद भी, आपको इस बात पर हैरानी होती है कि मुझमें अब भी गुस्सा और कड़वाहट है।’’

उमर के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस ने कहा कि पुलवामा हमले की दूसरी बरसी पर प्रतिकूल खुफिया इनपुट की वजह से सुरक्षा प्राप्त लोगों और अति विशिष्ट व्यक्तियों की गतिविधि ‘‘हतोत्साहित’’ की गई है।

श्रीनगर पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट में कहा, ‘‘आज लेथपोरा आतंकी हमले की दूसरी बरसी है। जमीनी स्तर पर कोई आरओपी नहीं होगा। विपरीत खुफिया जानकारी की वजह से अति विशिष्ट और सुरक्षा प्राप्त लोगों की गतिविधि हतोत्साहित की गई है और सभी संबंधित लोगों को अग्रिम तौर पर सूचना दी गई कि वे आज यात्रा से संबंधित कोई योजना न बनाएं।’’

हालांकि इसपर उमर ने पुलिस से पूछा, ‘‘कृपया मुझे बताएं कि आपने मुझे मेरे घर में किस कानून के तहत नजरबंद किया है? आप मुझे सलाह दे सकते हैं कि मैं घर से नहीं निकलूं लेकिन आप मेरी सुरक्षा का बहाना बनाकर मुझे घर में रहने को मजबूर नहीं कर सकते हैं।’’

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘ कृपया पूर्व में मेरे पते पर लिखित में दी गई इसकी जानकारी एवं उसे मेरे द्वारा स्वीकार करने की पावती साझा करें। निश्चित तौर पर यह बरसी प्रशासन के लिए अचानक तो नहीं है।’’

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि वह पार्टी के नेताओं और उनके परिजनों को ‘‘मनमाने तरीके से नजरबंद’’ किए जाने की निंदा करती है।

पार्टी ने ट्वीट किया, ‘‘ जेकेएनसी पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और उनके परिवार को श्रीनगर के गुपकर आवास में नजरबंद किए जाने की निंदा करती है। पार्टी तत्काल प्रभाव से इन गैरकानूनी कदमों को वापस लिए जाने की मांग करती है।’’

बाद में एक संयुक्त बयान में नेशनल कॉन्फ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद सागर समेत अन्य नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को उनके आवास में नजरबंद किए जाने की निंदा की और इस कदम को ‘‘मनमाना’’ तथा ‘‘मौलिक अधिकारों का हनन’’ बताया।

बयान में कहा गया, ‘‘पार्टी नेताओं को उनके घरों में नजरबंद किया जाना जम्मू-कश्मीर की तरफ कठोर रुख रखने का इशारा करता है। यह कदम मानवाधिकारों का उल्लंघन और बेहद निंदनीय है। इससे पहले भी कई मौकों पर नेताओं को किसी भी कारण से घर से बाहर जाने से रोक दिया गया।’’

पार्टी नेताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में मौलिक अधिकारों पर पाबंदियां अपने निचले स्तर पर पहुंचती जा रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के कड़े एवं अनुचित कदम लोगों को और अलग-थलग करेंगे तथा घाटी में सामान्य स्थिति बहाल होने में भी विलंब होगा। यह स्थान अगस्त, 2019 से ही डर और असुरक्षा के साये में है।’’

संयुक्त बयान में कहा गया है कि एक मौजूदा सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री के पद पर रहनेवाले व्यक्ति को नजरबंद किया जाना खराब कदम साबित होगा, इसलिए सरकार को इस तरह के कदमों से बचना चाहिए।

इससे पहले, पीडीपी अध्यक्ष एवं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी शनिवार को दावा किया था कि पिछले वर्ष दिसंबर में यहां के पारिमपोरा इलाके में कथित मुठभेड़ में मारे गए तीन आतंकवादियों में से एक अतहर मुश्ताक के परिजनों से मिलने जाने से पहले उन्हें नजरबंद कर दिया गया।

महबूबा ने ट्वीट किया था, ‘‘कथित मुठभेड़ में मारे गए अतहर मुश्ताक के परिवार से मिलने जाने से पहले हमेशा की तरह नजरबंद कर दिया गया। बेटे का शव मांगने पर उसके पिता के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया। क्या भारत सरकार कश्मीर आने वाले यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल को इसी तरह के सामान्य हालात दिखाना चाहती है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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