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मणिपुर विधानसभा में उग्रवादियों ने ग्रेनेड से किया हमला, BSF का एक जवान सहित तीन सुरक्षाकर्मी घायल

By भाषा | Updated: November 17, 2018 14:58 IST

घायलों को रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डाक्टरों ने बताया कि उनकी हालत खतरे से बाहर है।

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 मणिपुर विधानसभा परिसर में शुक्रवार को संदिग्ध उग्रवादियों के हथगोले से किए हमले में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक जवान सहित तीन सुरक्षाकर्मी घायल हो गये। पुलिस सूत्रों ने ये जानकारी दी। 

उन्होंने संवाददाताओं को बताया ये हमला तड़के पांच बजकर 55 मिनट पर इमारत के सुरक्षा द्वार पर हुआ। इसमें बीएसएफ का एक जवान और दो अन्य सुरक्षा कर्मी घायल हो गये। जवान मध्य प्रदेश का निवासी है। 

घायलों को रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डाक्टरों ने बताया कि उनकी हालत खतरे से बाहर है। घटनास्थल से एक हथगोला भी बरामद किया गया जिसे विशेषज्ञों ने नष्ट कर दिया है। 

इससे पहले सरकार ने मणिपुर के आठ उग्रवादी समूहों के गैरकानूनी और हिंसक गतिविधियों में शामिल बने रहने के लिए उन पर लगे प्रतिबंध को पांच साल के लिए बढ़ा दिया है।

गृह मंत्रालय ने कहा कि इन समूहों ने भारत से अलग होकर एक अलग मणिपुर राज्य बनाने के अपने मकसद को खुलकर व्यक्त किया है, उन्होंने अपने मकसद को हासिल करने के लिए सशस्त्र तरीके अपनाये हैं और सुरक्षा बलों, पुलिस तथा सरकारी कर्मचारियों पर हमले किये हैं।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत जिन संगठनों को प्रतबंधित किया गया है, उनमें पीपल्स लिबरेशन आर्मी या पीएलए और उसकी राजनीतिक इकाई, रिवॉल्यूशनरी पीपल्स फ्रंट (आरपीएफ), यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और इसकी सशस्त्र इकाई मणिपुर पीपल्स आर्मी (एमपीए), पीपल्स रिवॉल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलीपाक और उसकी सशस्त्र इकाई ‘रेड आर्मी’, कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) और इसकी सशस्त्र इकाई ‘रेड आर्मी’, कांगली याओल कांबा लुप (केवाईकेएल), कॉर्डिनेशन कमेटी और अलायंस फॉर सोशलिस्ट यूनिटी कांगलीपाक हैं।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि इन संगठनों पर पांच साल से लगे प्रतिबंध की सीमा हाल ही में समाप्त हो गयी थी और इसलिए पांच और साल के लिए इन्हें प्रतिबंधित घोषित करना जरूरी हो गया था।

मंत्रालय ने कहा कि मणिपुर में आठ उग्रवादी संगठन एक जनवरी 2013 से 31 जुलाई 2018 तक पिछले पांच साल में 756 हिंसक घटनाओं में शामिल रहे हैं जिस दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों के 35 जवानों समेत 86 लोगों की हत्या कर दी।

अधिसूचना के मुताबिक ये समूह आम लोगों को डराने-धमकाने, उनसे जबरन वसूली और लूट में शामिल रहे हैं। उन्होंने जनता की राय को प्रभावित करने के लिए विदेशी स्रोतों से संपर्क बनाये और अपने अलगाववादी मकसद को हासिल करने के लिए हथियारों तथा प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी मदद हासिल की।

टॅग्स :मणिपुरआतंकवादी
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