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हिंदी के प्रख्यात मार्क्सवादी आलोचक मैनेजर पाण्डेय का निधन, 81 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, कल होगा अंतिम संस्कार

By विमल कुमार | Updated: November 6, 2022 12:42 IST

नामवर सिंह के बाद की पीढ़ी के शीर्ष वामपंथी आलोचकों में शामिल रहे मैनेजर पाण्डेय का निधन रविवार सुबह हो गया। मैनेजर पाण्डेय का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले के लोहाटी गांव में 1941 में हुआ था।

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ठळक मुद्देमैनेजर पाण्डेय का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले के लोहाटी गांव में 1941 में हुआ था।हिंदी के प्रख्यात मार्क्सवादी आलोचक, नामवर सिंह के बाद की पीढ़ी के शीर्ष वामपंथी आलोचकों में थे शामिल।मैनेजर पाण्डेय जेएनयू में भारतीय भाषा केन्द्र के अध्यक्ष भी रहे, पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।

नई दिल्ली: हिंदी के प्रख्यात मार्क्सवादी आलोचक एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर मैनेजर पाण्डेय का रविवार सुबह यहां निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे तथा आईसीयू में भर्ती भी थे। पाण्डेय के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बेटियां भी हैं। उनका अंतिम संस्कार सोमवार शाम 4 बजे लोदी रोड स्थित शव दाह गृह में किया जाएगा।

जन संस्कृति मंच जनवादी लेखक संघ जैसे प्रमुख वामपंथी लेखक संगठनों तथा जाने माने लेखकों ने मैनेजर पाण्डेय के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

मैनेजर पाण्डेय: बिहार के गोपालगंज में हुआ जन्म

बिहार के गोपालगंज जिले के लोहाटी गांव में 23 सितम्बर, 1941 को जन्मे पाण्डेय दरअसल नामवर सिंह के बाद की पीढ़ी के शीर्ष वामपंथी आलोचक थे। उनकी आरम्भिक शिक्षा गाँव में तथा उच्च शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हुई, जहाँ से उन्होंने एम.ए. और पीएच. डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। 

वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भाषा संस्थान के भारतीय भाषा केन्द्र में हिन्दी के प्रोफेसर रहे। वे जेएनयू में भारतीय भाषा केन्द्र के अध्यक्ष भी थे। इसके पूर्व वह बरेली कॉलेज, बरेली और जोधपुर विश्वविद्यालय में भी प्राध्यापक रहे। उन्हें दिनकर सम्मान तथा हिंदी अकादमी के शलाका सम्मान से नवाजा गया था।

'मुगल बादशाहों की हिंदी कविता' चर्चित कृति

वे भक्तिकाल और सूर साहित्य के विशेषज्ञ थे। 'साहित्य और इतिहास दृष्टि' तथा साहित्य में समाज शास्त्र भूमिका एवम 'शब्द और कर्म' पुस्तक से उनको ख्याति मिली थी। 'मुगल बादशाहों की हिंदी कविता' उनकी चर्चित कृति थी। वे जनसंस्कृति मंच के अध्यक्ष भी थे।

हिंदी के प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह ही पाण्डेय की प्रतिभा को पहचान कर उन्हें 1977 में जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय में हिंदी विभाग में लाये थे।

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