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महाराष्ट्रः शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, ठाणे नगर निगम के 66 पार्षद शिंदे गुट में शामिल

By शिवेंद्र राय | Updated: July 7, 2022 13:58 IST

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को एक के बाद एक झटके लगते ही जा रहे हैं। पहले राज्य की सत्ता हाथ से गई और अब ठाणे नगर निगम के 67 में से 66 पार्षदों ने भी उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया है।

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ठळक मुद्देएकनाथ शिंदे के गुट में बागी और निर्दलीय विधायकों को मिलाकर अब 50 विधायक हो चुके हैं। एकनाथ शिंदे ने राज्य में हुए विधानपरिषद चुनावों के बाद बगावत कर दी थी।भाजपा के सहयोग से अब एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।

मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुसीबतें कम होती नहीं दिख रही हैं। शिवसेना विधायकों की बगावत के बाद उद्धव के हात से पहले प्रदेश की सत्ता छिनी और अब ठाणे नगर निगम भी उनके हाथ से फिसल गया है।

दरअसल मामला ये है कि ठाणे नगर निगम के 67 में से 66 पार्षद बागी एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए हैं। मुंबई के ठाणे ही महाराष्ट्र की दूसरे सबसे बड़ी नगर निगम है। ऐसे में 66 पार्षदों का पाला बदल के शिंदे गुट में शामिल होना उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।

बता दें कि महाराष्ट्र के मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ठाणे के कोपरी पछपाखड़ी सीट से ही विधायक हैं। इस इलाके में शिंदे की पकड़ बेहद ही मजबूत है। एकनाथ शिंदे ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत ठाणे से ही की थी और यहीं से 1997 में पहली बार निगम पार्षद बने थे।

एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से की थी बगावत

कभी शिवसेना के सबसे बड़े और कद्दावर नेताओं में गिने जाने वाले एकनाथ शिंदे ने राज्य में हुए विधानपरिषद चुनावों के बाद बगावत कर दी थी। शिवसेना के दो तिहाई विधायकों को अपने साथ जोड़कर शिंदे ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार गिरा दी थी। भाजपा के सहयोग से अब एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। शिंदे सरकार में भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस उप मुख्यमंत्री हैं।

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के गुट में बागी और निर्दलीय विधायकों को मिलाकर अब 50 विधायक हो चुके हैं। राज्य की सत्ता पहले ही शिंदे के हाथ में है और अब नगर निगमों पर भी शिंदे गुट का ही कब्जा होता दिख रहा है। लगातार मजबूत हो रहे बागी गुट से उद्धव ठाकरे को सबसे बड़ा खतरा पार्टी पर कब्जे का है। उद्धव ठाकरे कभी नहीं चाहेंगे कि पार्टी उनके हाथ से फिसल जाए।

टॅग्स :उद्धव ठाकरेThane Municipal Corporationएकनाथ शिंदेशिव सेनाBJP
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