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Maharashtra Lockdown: नागपुर में 57 हजार लोगों की नौकरियां गईं, ठप पड़ा उत्पादन, कई करोड़ का नुकसान

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 11, 2020 07:45 IST

कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए 18 दिनों से जारी लॉकडाउन ने स्थानीय उद्योंगों की कमर तोड़कर रख दी है। इससे प्रतिदिन रु. 51 करोड़ के उत्पादन के घाटे का आंकड़ा सामने आया है। लॉकडाउन के दौरान नागपुर के 4 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 57 हजार लोगों की नौकरियां चली गई हैं।

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ठळक मुद्देकोरोना वायरस के रोकथाम के लिए 18 दिनों से जारी लॉकडाउन ने स्थानीय उद्योंगों की कमर तोड़कर रख दी है।लॉकडाउन के दौरान नागपुर के 4 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 57 हजार लोगों की नौकरियां चली गई हैं।

नागपुर: एक कड़वी सच्चाई यह है कि कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान नागपुर के 4 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 57 हजार लोगों की नौकरियां चली गई है. शुरुआत में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने 19 मार्च को राज्य में लॉकडाउन किया. इसे बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 मार्च को 21 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया. यह लॉक डाउन अब 21वें दिन की ओर आगे बढ़ रहा है. ऐसे में इससे हुए नुकसान का आकलन करने के लिए लोकमत समाचार ने हिंगना, बूटीबोरी और कलमेश्वर औद्योगिक क्षेत्रों के औद्योगिक संगठनों से बात की.

हालांकि, मिहान-सेज के मामले में यह प्रयास विफल रहे. ऐसे में इस क्षेत्र का आकलन यहां कार्यरत यूनिटधारकों के आधार पर किया गया. एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एमआईए) के अध्यक्ष चंद्रशेखर शेगांवकर के अनुसार, लॉकडाउन के पहले तक हिंगना औद्योगिक क्षेत्र में 1050 यूनिट कार्यरत थीं. यहां रोजाना कुल 18 से 20 करोड़ रुपए का उत्पादन होता था. लेकिन वर्तमान में यहां केवल 35 यूनिट्स कार्यरत हैं और महज 1-1.50 करोड़ रुपए के उत्पाद बना रही हैं. लॉकडाउन के पहले हिंगना औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 30 हजार लोग काम कर रहे थे. लेकिन अब यहां केवल एक हजार लोग ही नौकरी कर रहे हैं.

बूटीबोरी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (एमआईए) के अध्यक्ष प्रदीप खंडेलवाल ने कहा कि बूटीबोरी औद्योगिक क्षेत्र में 550 यूनिट में से फिलहाल खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल और पैकेजिंग से संबंधित 20 से 23 यूनिट ही कार्यरत हैं. लॉकडाउन के पूर्व बूटीबोरी औद्योगिक क्षेत्र में 25 हजार लोग नौकरियां कर रहे थे. लेकिन अब यह आंकड़ा काफी कम होकर महज 1100 रह गया है. वहीं, रोजाना 30 करोड़ रुपए के बजाय अब 1.50-2 करोड़ रुपए का ही उत्पादन हो रहा है.

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