इंदौर: राज्य सरकार की समाधान योजना 2025-26 बिजली बकायादारों के लिए आर्थिक राहत के साथ डिस्कॉम्स की नकदी स्थिति सुधारने का बड़ा औजार बनती दिख रही है। प्रथम चरण में अब तक 11 लाख 88 हजार 240 उपभोक्ता पंजीयन करा चुके हैं, जिनसे 632 करोड़ 92 लाख रुपये मूल बकाया वसूला गया, जबकि 276 करोड़ रुपये का सरचार्ज माफ किया गया है।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार उपभोक्ताओं की लगातार भागीदारी को देखते हुए प्रथम चरण की अवधि बढ़ाकर 31 जनवरी 2026 कर दी गई है, ताकि अधिक से अधिक बकायादार 100 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ ले सकें।
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 3 लाख 84 हजार 130 उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराया है, जिससे कंपनी को 403 करोड़ 69 लाख रुपये मूल राशि प्राप्त हुई और 215 करोड़ 95 लाख रुपये का सरचार्ज माफ हुआ।
पूर्व क्षेत्र कंपनी में 3 लाख 98 हजार 470 उपभोक्ताओं ने योजना के तहत 122 करोड़ 79 लाख रुपये जमा किए, जबकि 43 करोड़ रुपये का सरचार्ज छोड़ा गया। पश्चिम क्षेत्र कंपनी में 4 लाख 5 हजार 640 उपभोक्ताओं से 106 करोड़ 44 लाख रुपये की मूल वसूली और 16 करोड़ 77 लाख रुपये के सरचार्ज की माफी दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से साफ है कि सबसे अधिक नकद प्रवाह मध्य क्षेत्र कंपनी को मिला, जबकि पंजीयन संख्या के मामले में पश्चिम क्षेत्र भी मजबूत भागीदारी दिखा रहा है। योजना का मूल उद्देश्य तीन माह से अधिक की बकाया अवधि वाले उपभोक्ताओं को विलंबित भुगतान पर लगने वाले भारी सरचार्ज से राहत देकर उन्हें सिस्टम में वापस लाना है।
यह मॉडल “जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं” के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें प्रथम चरण में बकाया बिल एकमुश्त जमा करने पर 60 से 100 फीसदी तक सरचार्ज माफी और दूसरे चरण (1 से 28 फरवरी 2026) में 50 से 90 फीसदी तक छूट का प्रावधान है।
घरेलू व कृषि उपभोक्ता कुल बकाया का 10 फीसदी और गैर-घरेलू व औद्योगिक उपभोक्ता 25 फीसदी अग्रिम जमा कर पंजीयन करा सकते हैं, जिसका सीधा असर इन श्रेणियों की भुगतान अनुशासन और लाइन-लॉस नियंत्रण पर पड़ेगा।
समाधान योजना को ऐप, एमपी ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेंटर और डिस्ट्रिब्यूशन सेंटरों के माध्यम से डिजिटल व भौतिक दोनों चैनलों पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में पहुंच आसान हुई है।
राज्य सरकार का आकलन है कि दो चरणों में लगभग 90 लाख उपभोक्ताओं तक पहुंचकर 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक सरचार्ज माफ करते हुए बड़ी मात्रा में मूल बकाया की वसूली हो सकती है, जो डिस्कॉम सुधार और उपभोक्ता हित—दोनों के लिए निर्णायक साबित होगी।