Lokmat National Conclave 2025: नई दिल्ली के मंच पर 'लोकमत नेशनल कॉन्क्लेव 2025' का आगाज हो गया है। राजनीति, अर्थशास्त्र और समाज के शीर्ष दिग्गजों का यह जमावड़ा 'विकसित भारत' के रोडमैप पर मंथन करेगा। यह कॉन्क्लेव न केवल नीतिगत चर्चाओं का केंद्र है, बल्कि देश की दशा और दिशा तय करने वाला एक वैचारिक महाकुंभ बनकर उभरा है।
आज लोकमत नेशनल कॉन्क्लेव के मंच पर पूर्व CJI गवई और पूर्व सीईसी कुरैशी, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी मौजूद हैं। नेशनल कॉन्क्लेव के मंच पर गवई और सीईसी कुरैशी ने सभा को संबोधित करते हुए कई बातें कही। भारतीय लोकतंत्र में जनता और राजनीति से प्रभावित हुए बिना कैसे न्यायपालिका काम करती है इस पर बात करते हुए गवई ने प्रतिक्रिया दी है।
एकंर के सावल लोकतंत्र के लिए सबसे ज्यादा क्या जरूरी है? इस पर जवाब देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि भारत के सभी शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक संस्थान लोकतंत्र के स्तंभ हैं। संसद, चुनाव आयोग, आर्मी ये सभी हमारे लोकतंत्र के स्तंभ है।
लोकमत नेशनल कॉन्क्लेव जैसे मंचों पर जस्टिस गवई अक्सर 'संविधान की आत्मा', 'मानवीय गरिमा' और 'सामाजिक न्याय' जैसे विषयों पर जोर दिया हैं। 2025 के कॉन्क्लेव में उनके संबोधन का मुख्य केंद्र यह रहा है कि कैसे न्यायपालिका और कार्यपालिका मिलकर 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं, जबकि संवैधानिक मर्यादाएं बनी रहें।
इस कॉन्क्लेव में मनोज कुमार झा (राजद सांसद) और सुनील तटकरे (एनसीपी सांसद) जैसे दिग्गज नेताओं ने हिस्सा लिया है।