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लोकसभा चुनावः क्या गैर-भाजपाई महागठबंधन के लिए डर के आगे जीत है?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: March 5, 2019 13:59 IST

यूपी में सपा-बसपा ने एक तरफा गठबंधन करके कांग्रेस को बाहर रखा था, परन्तु अब समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन ने कांग्रेस को कुछ और सीटों का ऑफर दिया है.

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पुलवामा हमले के बाद एयर स्ट्राइक, वायुसेना के हीरो अभिनंदन की वापसी जैसे घटनाक्रम का प्रत्यक्ष लाभ लोस चुनाव में बीजेपी उठाने जा रही है, इसका वास्तव में बीजेपी को कितना फायदा होगा यह तो समय बताएगा, लेकिन अप्रत्यक्ष फायदा महागठबंधन को हो सकता है कि उसका बिखराव रूक जाए?

यूपी में सपा-बसपा ने एक तरफा गठबंधन करके कांग्रेस को बाहर रखा था, परन्तु अब समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन ने कांग्रेस को कुछ और सीटों का ऑफर दिया है. यही नहीं, आप ने दिल्ली के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी, बावजूद इसके, दिल्ली में आप-कांग्रेस गठबंधन पर फिर से चर्चा शुरू हुई है.

विपक्षी एकता के समर्थक नेताओं- आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू, एनसीपी नेता शरद पवार आदि का सियासी दबाव यह भी है कि पश्चिम बंगाल में भी सीएम ममता बनर्जी और कांग्रेस, चुनाव पूर्व गठबंधन करें. विपक्षी नेताओं को लगता है कि गैर-भाजपाई एक-एक वोट बेहद कीमती है और यदि ऐसे वोटों का बिखराव नहीं रूका तो बीजेपी इसका बड़ा फायदा उठा सकती है. यह भी कहा जा रहा है कि जब बीजेपी बैक फुट पर जा कर सहयोगी दलों से गठबंधन कर सकती है, तो गैर-भाजपाई दल ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं?

याद रहे, यूपी में सपा-बसपा ने कांग्रेस को कमजोर मान कर कांग्रेस के लिए अपनी ओर से केवल दो सीट- रायबरेली और अमेठी ही छोड़ी थी, लेकिन यूपी में कांग्रेस की ताकत तो लगातार बढ़ ही रही है, उधर नए घटनाक्रम के बाद बीजेपी भी मजबूत बन कर उभर रही है, लिहाजा सपा-बसपा गठबंधन के नेता इस गठबंधन में कांग्रेस को भी जगह देने की पहल कर सकते हैं. सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस के लिए प्रस्तावित सीटों पर कांग्रेस क्या कदम उठाती है, यह देखना दिलचस्प होगा. 

एक दिक्कत यह भी है कि शिवपाल यादव के साथ प्रियंका गांधी की टेलीफोन पर बातचीत करने से भी सपा विचलित है, क्योंकि शिवपाल यादव, कांग्रेस के साथ गठबंधन करने में कामयाब हो जाते हैं, तो उसका नुकसान भी सपा वोट बैंक को ही होगा.

बीजेपी के बढ़ते असर के मद्देनजर पश्चिम बंगाल में वामदलों द्वारा कांग्रेस के मौजूदा सांसदों के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारने की संभावना है तो महाराष्ट्र में एनसीपी के कोटे से एमएनएस को भी एक सीट मिल सकती है. यही नहीं, एनडीए के नेता रामदास अठावले को अगर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में सीट नहीं मिली तो उन्हें भी गैर-भाजपाई गठबंधन में जगह मिल सकती है. 

सियासी संकेत यही हैं कि बीजेपी का नया सियासी समीकरण, लोस चुनाव में बीजेपी को बड़ा फायदा पहुंचाएगा या नहीं, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन केन्द्र में बीजेपी की वापसी का डर महागठबंधन की एकता का कारण हो सकता है!

टॅग्स :लोकसभा चुनावउत्तर प्रदेशअखिलेश यादवमायावतीभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
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