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लोकसभा चुनाव: पश्चिमी यूपी की इन 8 सीटों से पता चलेगा प्रदेश में राजनीतिक लहर की दिशा, आज थम जायेगा चुनाव प्रचार

By विकास कुमार | Updated: April 9, 2019 17:17 IST

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर की बदौलत बीजेपी ने इन सभी सीटों पर भगवा झंडा लहराया था. लेकिन इस बार परिस्थितियां उस रूप में अनुकूल नहीं है. बालाकोट एयरस्ट्राइक ने राजनीतिक माहौल को कुछ हद तक बीजेपी के पक्ष में करने का काम किया है लेकिन इस पूरे क्षेत्र में वोटरों के बीच बंटवारे की एक लकीर खींच चुकी है.

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ठळक मुद्देमुज्ज़फरनगर से चौधरी अजित सिंह खुद मैदान में हैं.सहारनपुर में ही मुस्लिम वोटर 40 प्रतिशत से ज्यादा हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ भी हिंदूत्व का कार्ड ही खेल रहे हैं.

लोकसभा चुनाव के पहले चरण का प्रचार-प्रसार मंगलवार को थम जायेगा. देश के कई राज्यों में पहले चरण की सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान किया जायेगा. सहारनपुर, बिजनौर, मुज़फ्फरनगर , बागपत, कैराना, गाजियाबाद, मेरठ और गौतमबुद्धनगर में पहले चरण का मतदान यूपी में राजनीतिक पार्टियों को धरातल का एहसास कराने के लिए पर्याप्त होगा. 

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर की बदौलत बीजेपी ने इन सभी सीटों पर भगवा झंडा लहराया था. लेकिन इस बार परिस्थितियां उस रूप में अनुकूल नहीं है. बालाकोट एयरस्ट्राइक ने राजनीतिक माहौल को कुछ हद तक बीजेपी के पक्ष में करने का काम किया है लेकिन इस पूरे क्षेत्र में वोटरों के बीच बंटवारे की एक लकीर खींच चुकी है. 

बीते दिनों सहारनपुर में महागठबंधन की रैली हुई जिसमें मायावती ने मुस्लिम वोटरों से कांग्रेस को वोट नहीं देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी को हराने में केवल महागठबंधन ही सक्ष्म है. मायावती के इस एलान के पीछे एक वेस्टर्न यूपी में मुस्लिम वोटरों की बड़ी तादाद है. सहारनपुर में ही मुस्लिम वोटर 40 प्रतिशत से ज्यादा हैं. कैराना में 5 लाख 68 हजार मुस्लिम वोट हैं और इस सीट पर भी जीत-हार का फैसला मुस्लिम वोटर्स ही करते हैं. 

चौधरी अजित सिंह का राजनीतिक भविष्य दांव पर 

मुज़फ्फरनगर से चौधरी अजित सिंह खुद मैदान में हैं. इस सीट पर 2014 में बीजेपी के संजीव बालियान ने बीएसपी के उम्मीदवार कादिर राणा को 4 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था. पिछली बार उन्होंने बागपत से चुनाव लड़ा था और उम्मीद से ज्यादा खराब प्रदर्शन किया था. इस बार जीत को सुनिश्चित करने के लिए जाट-मुस्लिम गठजोड़ को फिर से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि युवा जाट वोटरों की दीवानगी आज भी मोदी के प्रति बनी हुई है और बालाकोट ने इसे और बढ़ाने का काम किया है.

मथुरा से हेमा मालिनी के खिलाफ पिछली बार जयंत चौधरी ने चुनाव लड़ा था और उन्हें करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था. इस बार जयंत बागपत से चुनाव लड़ रहे हैं. जहां बीजेपी के सत्यपाल सिंह होंगे जिन्होंने पिछली बार इनके पिता को हराया था. कैराना में एसपी की उम्मीदवार तबस्सुम हसन है. बीजेपी ने तबस्सुम के खिलाफ प्रदीप चौधरी को अपना प्रत्याशी बनाया है. प्रदीप गुजर समुदाय से आते हैं. 

गाजियाबाद में बीजेपी के भीतर कई गुट बन चुके हैं. लेकिन वीके सिंह की मजबूत छवि और नरेन्द्र मोदी के नाम पर लोगों के बीच राजनीतिक भावनाएं उफान पर हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ भी हिंदूत्व का कार्ड ही खेल रहे हैं. क्षेत्र के गन्ना किसानों में नाराजगी है लेकिन इसका कितना असर राजनीतिक परिणाम पर पड़ेगा यह 23 मई को ही पता चलेगा. खैर, तमाम मुद्दों पर राष्ट्रवाद की लहर हावी है. 

महागठबंधन की अग्नि परीक्षा 

महागठबंधन की असली परीक्षा पश्चिमी यूपी में ही होगी. जाट-मुस्लिम-दलित वोटों के गठजोड़ के रास्ते मायावती और अखिलेश उत्तर प्रदेश में भाजपा को धूल चाटना चाहते हैं. वहीं बीजेपी राष्ट्रवाद और हिंदूत्व के सहारे यूपी का राजनीतिक किला भेदना चाहती है. कांग्रेस कुछ ख़ास लड़ाई में दिख नहीं रही है. 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, कांग्रेस यूपी में जितना मजबूत होगी इसका उतना ही फायदा बीजेपी को मिलेगा. महागठबंधन को भी मुस्लिम वोटों के बंटवारे का डर सता रहा है. खैर, तमाम मुद्दों पर राष्ट्रवाद की लहर हावी है. 

टॅग्स :लोकसभा चुनावउत्तरा प्रदेश लोकसभा चुनाव 2019योगी आदित्यनाथमायावतीअखिलेश यादवजयंत चौधरी
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