लालू प्रसाद यादव की बढ़ी मुश्किलें, कौटिल्य नगर आवास को लेकर नियमों के उल्लंघन पर उठा सवाल
By एस पी सिन्हा | Updated: January 4, 2026 16:47 IST2026-01-04T16:47:44+5:302026-01-04T16:47:44+5:30
इस संबंध में गुड्डू बाबा ने उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा को पत्र लिखकर उन्होंने लालू यादव के आवास की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आरोप है कि सांसद और विधायकों को आवंटित जमीन में शर्त और नियमों का उल्लंघन हुआ है।

लालू प्रसाद यादव की बढ़ी मुश्किलें, कौटिल्य नगर आवास को लेकर नियमों के उल्लंघन पर उठा सवाल
पटना: राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने लालू यादव के कौटिल्य नगर आवास को लेकर नियमों के उल्लंघन पर सवाल उठाया है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव के कौटिल्य नगर आवास पर नियम उल्लंघन के लिए जांच की मांग की है। इस संबंध में गुड्डू बाबा ने उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा को पत्र लिखकर उन्होंने लालू यादव के आवास की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आरोप है कि सांसद और विधायकों को आवंटित जमीन में शर्त और नियमों का उल्लंघन हुआ है।
बता दें कि लालू प्रसाद यादव खरमास बाद इसी कौटिल्य नगर आवास में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल, भवन निर्माण विभाग के द्वारा राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड का आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है। बकौल गुड्डू बाबा के अनुसार कौटिल्य नगर की यह जमीन सांसद-विधायक कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से आवंटित की गई थी, लेकिन नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया गया है।
उन्होंने विजय कुमार सिन्हा को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। गुड्डू बाबा ने आरोप लगाया कि लालू सहित कई माननीयों को आवंटित प्लॉट्स में एक से अधिक प्लॉट लेने, बेचने और व्यावसायिक इस्तेमाल जैसी अनियमितताएं हुई हैं। यह पत्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यपाल और अन्य अधिकारियों को भी भेजा गया है।
बताया जाता है कि कौटिल्य नगर की यह जमीन मूल रूप से वेटनरी कॉलेज की थी जो 1916 में पटना विश्वविद्यालय के लिए अधिग्रहित हुई थी। 1987 में बिहार सांसद एवं विधान मंडलीय सदस्य सहकारी समिति को 15 एकड़ सरकारी जमीन दी गई, ताकि सांसद-विधायकों को आवास के लिए प्लॉट आवंटित किए जा सकें। नियम थे कि किसी को एक से अधिक प्लॉट नहीं मिलेगा और बेचने पर सोसाइटी को सरेंडर करना पड़ेगा।
1992 में जब लालू यादव मुख्यमंत्री थे तो प्लॉट संख्या 208 आवंटित हुआ था। लेकिन, आरोप है कि उन्होंने और उनके परिवार ने नियम तोड़कर अतिरिक्त प्लॉट हासिल किए। कुल 5 प्लॉट मिलाकर आलीशान घर बनाया गया, जिसमें प्लॉट 207, 151, 209, 211 और 210 शामिल हैं। इनमें से कुछ सस्ते दामों पर खरीदे गए थे। आरोपों के अनुसार राबड़ी देवी ने 2002-2003 में दो प्लॉट 72 हजार और 37 हजार रुपए में लिए थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लीज की शर्तें थीं कि जमीन केवल आवास के लिए इस्तेमाल होगी, लेकिन व्यावसायिक उपयोग हुआ। लालू यादव जब रेल मंत्री थे तो प्लॉट 208 पर एसएसबी का जोनल ऑफिस चला था और इसकी लीज 30 साल की थी। यह लीज 2017 में खत्म हो गई, लेकिन 2025 में चुनाव से पहले रिन्यू की गई।
उल्लेखनीय है कि इसी प्लॉट को लेकर दिवंगत सुशील कुमार मोदी की किताब ‘लालू लीला’ में दावा है कि लालू ने एक लाख रुपए में 5000 वर्ग फीट जमीन लिखवाई और सोसाइटी की मिलीभगत से अतिरिक्त प्लॉट लिए। इसके बाद गुड्डू बाबा ने 2016 में पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी, जहां जिलाधिकारी ने शपथ पत्र में जमीन वेटनरी कॉलेज की होने की पुष्टि की थी।
इस बीच जदयू के मुख्य प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने भी जमीन अधिग्रहण की जांच की मांग की, पूछा कि क्या दान में मिली या सर्किल रेट पर खरीदी गई? जदयू ने लालू परिवार के महुआबाग और कौटिल्य नगर दोनों बंगलों की जांच की मांग की है। वहीं, पूरे मामले पर विजय सिन्हा ने कहा है कि शिकायत मिलने पर तुरंत जांच होगी और अगर राजस्व हानि या धोखाधड़ी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, लालू परिवार खरमास बाद परिवार समेत कौटिल्य नगर के इस नए घर में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं। घर का निर्माण तेजी से चल रहा है जहां 24 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं। यह घर काफी भव्य है और लालू यादव की सेहत की स्थिति को देखते हुए बनाया गया है।